आज बहुत दिनों बाद ब्लॉग लिख रहा हूँ. पिछले कुछ दिनों से अपने डाक्टरों की सलाह पर विश्राम के लिये विदेश में हूँ. साथ में सिर्फ मेरी पुत्रियाँ दृष्टि और दिशा और पत्नी पंकजा है. बिना अपने मित्रों के शुद्ध परिवार के साथ यह मेरी प्रथम विदेश यात्रा है. इस यात्रा का पहला लाभ तो यह हुआ कि मैने अपनी ही बेटियों को अच्छी तरह पहली बार नजदीक से जाना और पहचाना. दृष्टि मेरी तरह जिद्दी और संवेदनशील और दिशा …