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Sep 5

बदलाव

Posted by Amar Singh in General

जीवन परिवर्तनशील है और बदलाव जीवन की एक नितांत सत्यता. बदलाव सिर्फ बड़े होटलों की लाबी का ही नहीं, इंसानी रिश्तों का भी होता है. निर्जीव बदलाव पीड़ाहीन और सजीव बदलाव पीड़ायुक्त होता है. बदलाव एक विभीषिका के बाद का वरदान भी हो सकता है. जापान को ही देख ले, हिरोशिमा और नागासाकी के बाद यह देश आधुनिक विश्व में तकनीकी के क्षेत्र का सबसे बड़ा विकसित देश बना. युगों की संस्कृति की धरोहर का हमारा यह महान देश आज …

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Sep 4

अति-पिछडों को अनुसूचित जातियों की तर्ज पर आरक्षण

Posted by Amar Singh in General

स्वतंत्रता के बाद हमारे संविधान में अनुसूचित जातियों और जनजातियों को आरक्षण दे कर उनकी दरिद्रता को दूर करने का जो प्रयास किया गया समय के साथ उसके परिणाम आए और आज कभी दलित कहे जाने वाला वर्ग आर्थिक और सामाजिक रूप से तेजी के साथ आगे बढ़ रहा है जिसका जीता-जगता उदाहरण उत्तर प्रदेश की मुख्यमंत्री सुश्री मायावती जी है. वैसे इस बात से भी इंकार नहीं किया जा सकता है कि दलितों को दिए गए आरक्षण का लाभ …

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Aug 23

“तेरी दुनिया से दूर चले होके मजबूर हमें याद रखना”

Posted by Amar Singh in General

पिछले हफ्ते राजीव जी का जन्म दिन था. मेरी उनसे कुल एक मुलाक़ात थी. भाई गुलाम नबी आजाद के घर पर वह कई बार समाजवादी दल के प्रमुख से मिलते-जुलते थे और आखरी मुलाक़ात में साथ का वादा करके समाजवादी पार्टी ने सीधे प्रातःकाल राज भवन जा कर उत्तर प्रदेश की सरकार निरस्त करवा दी. ऐसा क्या था कि सपा सुप्रीमो से ले कर स्वर्गीय वी.पी सिंह तक कई निराशाएं राजीव जी के हाँथ लगी. असल में मेरे आंकलन में …

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Aug 4

खौफ का जर्फ़

Posted by Amar Singh in General

जर्फ़ यानि मर्यादा की परिभाषा असीमित है. सिंगापुर मेरी जीवनधारा का एक स्रोत बन गया है. इसी सिंगापोरे में कई मास के प्रवास में श्री अमिताभ बच्चन जी ने ब्लागिंग के आदत डलवा दी थी, सुना है कि अब वह “ट्वीट” करते है. बुद्ध ने जैसे बोध गया में आत्ममंथन कर ज्ञान प्राप्त किया वैसे ही टहलते हुए सिंगापुर के उद्यानों में पता चला कि मै कौन हूँ? एक राजनेता अथवा एक परिवार के सभी सदस्य जो राजनीति में है …

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Aug 1

सुरेश कलमाडी, ललित मोदी और खेल

Posted by Amar Singh in General

भाई सुरेश कलमाडी जी को मै बहुत वर्षों से जानता हूँ. वह एक हंसमुख, मिलनसार भूतपूर्व सैनिक अधिकारी है. १९७७ में हुई कांग्रेस की सोचनीय पराजय के पश्चात सुरेश जी तत्कालीन युवा नेता श्री प्रियरंजनदास मुंशी के एवं श्री शरद पवार के संपर्क में रहे और इंदिरा कांग्रेस के विरोधी. श्री राजीव गांधी के सत्ताहीन होने पर वह उस समय के उनके अनन्य सहयोगी श्री अरुण सिंह जी के काफी निकट हो गए और उसके तत्काल बाद पुणे में उनका …

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Jul 29

दूरियां

Posted by Amar Singh in General

इंसानी रिश्ते बड़े अजीबोगरीब होते है. कभी-अभी वर्षों के साथी बिछड जाते है और असमान्य रूप से जिनसे कोई अपेक्षा नहीं होती, आकर जुड जाते है. नजदीकी रिश्तों में प्रविष्ट दूरियां काफी खतरनाक होती है क्यूंकि रिश्ते की यह दूरी सहज संवाद की प्रक्रिया को भी खत्म कर देती है. “इंदिरा जी भारत है और भारत इंदिरा जी”, का यह पर्यायवाची नारा देने वाले, श्री देवकांत बरुआ जब इंदिरा जी से दूर हुए तो क्या हुआ? शानदार व्यक्तित्व के स्वामी …

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Jul 22

हम बोलेंगे तो बोलोगे कि बोलता है!

Posted by Amar Singh in General

बोलना और डोलना सन्यासी और राजनेता का कर्म और धर्म है. प्रश्न यह है कि बोले क्या, और जनाब आप डोले कहाँ? अगर आपके बोलने और डोलने की डगर ठीक है तो आपको रमेश भाई, मुरारी बाबू की भांति अध्यात्मिक शिष्य और राजनीति में है तो असंख्य प्रशंसक मिल जाएँगे. जरूरी नहीं है कि आपके धार्मिक सत्संग का श्रवण करने वाले श्रोता संत प्रवत्ति के हो जाएँ और यह भी आवश्यक नहीं कि आपकी रैली में उपस्थित रेला आपका मतदाता …

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Jul 17

लागा चुनरी में दाग मिटाऊं कैसे?

Posted by Amar Singh in General

आज अखबार में पढ़ा, अपने पुराने पहलवान नेता की माफीनामा का दांव देखा. भारतीय जनता पार्टी की मदद से तीन बार मायावती जी मुख्यमंत्री बनी, श्री नरेन्द्र मोदी के पक्ष में गुजरात जाकर प्रचार किया, फिर भी मुसलमान भाइयों को इतना बुरा नहीं लगा और गाहे बगाहे कई क्षेत्रों में उन्होंने बहुजन समाज पार्टी की हिमायत भी कर दी. इसके पीछे का कारण कि मायावती जी के भाजपाई रिश्ते के मुकाबले मुलायम सिंह जी की एक भूल भी मुसलमान माफ …

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Jul 12

सर कटा सकते है लेकिन सर झुका सकते नहीं

Posted by Amar Singh in General

संघर्ष भीषण, उग्र, संवेदनशील, क्रूर और दुःखदायी होता है. बुलन्दशहर के आम क्षत्रिय भईयों ने एवं विधायक नागर ने एक छोटी पांच लाख की राशि एवं पुराने प्रशासन के दो पूर्व नियुक्त क्षत्रिय अधिकारी ठाकुर अभिषेक सिंह एवं क्षत्राणी श्रीमती राधा सिंह की प्रशासनिक सक्रियता और भाई जीतू ठाकुर द्वारा संगृहीत लाखों की राशि ने उदयपुर की बाईस फिट के महाराणा प्रताप की प्रतिमा के बाद साढे ग्यारह फिट की प्रतिमा का निर्माण बुलंदशहर में कर दिखाया. मुझे इस प्रतिमा …

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Jul 6

धर्मनिरपेक्षता का भाजपाईकरण

Posted by Amar Singh in General

कहीं कभी आपने देखा या सुना है कि सांप और नेवला साथ-साथ हों. यह अजूबा पिछले दिनों भारतीय राजनीति में देखने को मिला. भाई अरुण जेटली और अखिलेश यादव एक ही दिन एक ही कार्यक्रम में एक ही शहर में गिरफ्तार हुए. हद तो तब हो गई जब सपा नेता अबू आजमी और श्री गोपीनाथ मुंडे मुम्बई में हाथ में हाथ डाले एक साथ गिरफ्तार हुए. वामपंथी नेताओं ने जब सदन में महंगाई के मुद्दे पर “कट मोशन” लाया तो …

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