आतंकवाद के मुद्दे पर दिल्ली की बैठक में श्री नरेन्द्र मोदी फिर बोले. अबकी वह यूपीए की चेयरपर्सन सोनिया गांधी जी के विरुद्ध नहीं बल्कि केन्द्रीय गृह मंत्री श्री चिदम्बरम एवं प्रधानमंत्री श्री मनमोहन सिंह की तारीफ़ में बोले. आतंरिक सुरक्षा एवं आतंकवाद पर तत्परता से कार्यवाही करने के केन्द्रीय सरकार के उद्यम को उन्होंने खूब सराहा. नरेन्द्र भाई काफी चर्चित व्यक्ति है. इनकी तारीफ़ और नफ़रत दोनों से बड़ी चिंता होती है. कहीं उनकी इस प्रशंसा से सरकार के धर्म निरपेक्ष चहरे पर साम्प्रदायिकता की कालिख न लग जाए, ठीक वैसे ही जैसे कि गुजरात के पर्यटन के प्रचार के अमिताभ बच्चन जी के निर्णय पर खूब कोलाहल मचा. चाहे हम माने या ना माने, चाहे या ना चाहे, इस लोकशाही में चुनावों के महासमर में विजयी चर्चित और विवादित चेहरों को हमें सहना ही पडेगा.

डाक्टर राम मनोहर लोहिया किसी परिस्थिति एवं समस्या के गुणदोष में मात्र भेद-भाव के सिद्धांत को मानते थे. यह मात्र भेद-भाव का सिद्धांत आज भी व्यवहारिक एवं प्रासंगिक है. मोदीजी की प्रशासनिक चुस्ती, राजनैतिक तत्परता, त्वरित गति से गलत-सही निर्णय लेने की क्षमता को सराहे बिल्कुल नहीं पर नज़र में जरूर रखे और धार्मिक उन्माद के आधार पर प्रायोजित हिंसा की प्रवत्ति को राजनीति कहने की खूब निंदा भर्त्सना करे. श्री नरेन्द्र मोदी के व्यक्तित्व के दोनों पहलुओं के बीच की इस महीन लकीर को यदि हम चिन्हित नहीं करेंगे, तो गुजरात के पर्यटन का प्रचार करने पर श्री बच्चन मोदीवादी, गुजरात के योजना बजट पर विचार करने वाले श्री मोंटेक सिंह जी भी मोदीवादी एवं मुख्यमंत्री सम्मलेन में साथ बैठने पर प्रधानमंत्री श्री मनमोहन सिंह जी और मोदी के द्वारा प्रशंसित गृहमंत्री श्री चिदंबरम भी पत्रकार, देश, समाज एवं यूपीए के सियासी विरोधियों की नज़र में मोदीवादी हो जाएंगे.

आखिर भारत अमेरिका तो नहीं है कि विवादित श्री मोदी का बायकाट कर दे. सभ्य सुसंकृत समाज श्री नरेन्द्र मोदी की फिरकापरस्त सियासत को तो बायकाट कर सकता है लेकिन गुजरात के चुने हुए संवैधानिक मुख्यमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी को, मनमोहन जी, चिदंबरम जी, मुकेश अम्बानी, अमिताभ बच्चन और ललित मोदी जैसे लोग चाह कर भी दर किनार नहीं कर सकते है. हाँ यूपीए अध्यक्ष श्रीमती सोनिया गांधी और कांग्रेस के युवा महासचिव श्री राहुल गांधी उनसे दूरी रख सकते है क्योंकि इश्वर की कृपा से दोनों संविधान के किसी पद की मर्यादा से मुक्त है और स्वतंत्र है. वाह रे नरेन्द्र भाई आप हिन्दुस्तान की सियासत के वह लड्डू है जो खाए पछताए, जो गुजरात जा कर ना खाए वो और ज्यादा भी पछताए. रही बात पत्रकार भाइयों की चाहे टीवी के हो या प्रिंट के, उनको एक जरूरी सलाह दे रहा हूँ,

“हर मौसम में फतवा जारी किया करो, सबको रुसवा बारी-बारी किया करो.”

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