राह पकड़ तू एक चला-चल, मिल जाएगी मधुशाला. प्रख्यात कवि श्री हरिवंशराय बच्चन जी की मधुशाला की यह प्रसिद्द पंक्ति उन सबो के लिए है जो अपने उसूलों के रास्ते बिना बदले चलते-चलते अपने निर्धारित लक्ष्य पर पहुँच जाते है. लेकिन उन राजनेताओं का क्या करे जो सुबह, दोपहर और शाम कपड़े की तरह अपने उसूल बदल डालते है. समाजवादी पार्टी समर्थन करती है नारायणन के उम्मीदवारी की, राष्ट्रपति बनवा देती है कलाम साहब को, स्वयं समाजवादी पार्टी के मुखिया कांग्रेस के पक्ष में ६-७ सीटे छोड़ देते है, पत्रकार वार्ता के मध्य और दूसरे दिन बदल जाते है; वामपंथी दलों एवं अन्य विपक्षी दलों का गठबंधन बनाकर महंगाई के सवाल पर हड़ताल का उपक्रम करते है और तय रणनीति के विरुद्ध कट मोशन का समर्थन की जगह बायकाट कर सदन से बहिर्गमन करते है, ऐसा ही कुछ श्रीमती प्रतिभा पाटिल जी के राष्ट्रपति चुनाव में भी होता है.

उत्तर प्रदेश में सुश्री मायावती, श्री अजित सिंह, श्री कल्याण सिंह यहाँ तक कि १९७७ से ८० तक भाजपा भी, श्री मुलायम सिंह के साथ काम-काज करके धोखा खा चुकी है. श्री राजीव गांधी मुलायम सिंह पर बहुत विश्वास करने लगे थे और अक्सर श्री गुलाम नबी आज़ाद के घर पर उनकी बैठकें होती थी. श्री वी.पी. सिंह की जगह श्री चंद्रशेखर के लाने की योजना का प्रारूप इन्ही बैठकों में तय हुआ था. रात भर राजीव जी से मिल कर सीधे सबेरे सोते हुए राज्यपाल को जगा कर राजीव जी से हुई बातचीत के प्रतिकूल सरकार भंग करने का काम करके कांग्रेस को पहली दगा देने का कामकाज भी नेता जी ने ही किया था. ऐसा कोई सगा नहीं, जिसको दिया दागा नहीं. १४ सालों के अथक परिश्रम और अंधभक्ति के बदले मेरे खराब गुर्दे पर मोहन सिंह की टिप्पणी, मुझे बेशरम, कूड़ा, पागल कह कर बेइज्जत करने की भाई रामगोपाल की रणनीति, बच्चे की तरह पढाई से विवाह तक साथ निभाने पर भी अखिलेश यादव की मुझे निष्काषित करते वक्त की चुप्पी से यह आंकलन लगाया जा सकता है कि यदि सपाई और उनके मुखिया मेरे नहीं हुए तो किसके होंगे?

कोचीन में कुछ कामरेडों ने कहा कि न्यूक्लीअर डील बकौल मुलायम मैने कराई. मोहन सिंह ने आरोप भी लगाया कि ऐसा मैने व्यक्तिगत स्वार्थवश किया था और कांग्रेस से मेरा कुछ लेन-देन हुआ था. यहाँ तक कि सपा द्वारा इस वर्त्तमान सरकार के समर्थन में दिया पत्र मेरे हस्ताक्षर का है, मुलायम के हस्ताक्षर का नहीं, अतएव सपा द्वारा यू.पी.ऐ. सरकार को दिया गया यह समर्थन बिल्कुल अवैध है, ऐसा मोहन सिंह ने कहा. नेता जी महंगाई के सवाल पर अब आप विरोधी महागठबंधन में वामपंथियों के साथ है तो nuclear liability bill पर आप सरकार का साथ कैसे दे रहे है, अब तो अमर सिंह की संगत के दुष्प्रभाव से आप बिल्कुल मुक्त है. श्री प्रकाश कारत कृपया अब आप श्री मुलायम सिंह से पूंछे कि अब अपराधी कौन है, अमर सिंह तो अब नहीं है. इसी बात का आंकलन अन्य दलों के नेता और मोहन सिंह भी करें.

मैने कहा था कि मै मुलायम सिंह का मात्र दर्जी और कूड़ेदान हूँ. उनकी गलत सलत नीतियों को नैतिकता का कपड़ा सिल कर संवारने का मै १४ साल का अपराधी और जनता एवं राजनीति के छले हुए पुरोद्धाओं का क्षमाप्रार्थी हूँ. दल के अन्दर की गलतियों का श्रेय लेने वाला कूड़ेदान अब मै नहीं रहा. आदरणीय मुलायम सिंह जी अब आप अपनी अच्छी बुरी राजनीति के अकेले जिम्मेदार दर्जी और कूड़ेदान खुद है, आपको अपनी नई भूमिका मुबारक, मेरे राजनैतिक निर्वाण के लिए बहुत बहुत शुक्रिया. कामरेड सुरजीत, अमर सिंह के बाद ४ सांसदों वाले लालू यादव ने आपको अपना कंधा रोने के लिए दे दिया है लेकिन भारी कीमत वसूल कर. २० से अधिक सांसद वाले मुलायम ४ सांसदों वाले लालू के पीछे घूम रहे है. मेरी चिंता छोडिये, जीवन की तमाम विधाएं जो राजनीति से भी ऊध्र्व है, मुझे उपलब्ध है. रेडिओ में बड़े भाई अमिताभ बच्चन का एक गाना आ रहा है. आपके सन्दर्भ में बिल्कुल खरा है,

अपनी तो जैसे तैसे, थोड़ी ऐसे या वैसे कट जाएगी,
आपका क्या होगा जनाबे आली, आपका क्या होगा जनाबे आली

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