मै आज अपने ब्लॉगर साथियों को बताना चाहता हूँ कि अंतिम बार मै अब अपनी पुरानी पार्टी के बारे में लिख रहा हूँ. आज मै एक रहस्योदघाटन कर रहा हूँ जो बहुत ही स्तब्ध करने वाला है. सबसे पहले मै उत्तर प्रदेश की मुख्यमंत्री सुश्री मायावती से खेद व्यक्त करते हुए कहना चाहता हूँ कि बाबूपुरवा थाने में जिस झूठी शिकायत पर मुझ पर पांच सौ करोड़ के घोटाले का झूठा आरोप लगाया गया उस के मूल में बहुजन समाज पार्टी की सुप्रीमो मायावती जी नहीं बल्कि हमारी पुरानी पार्टी के प्रमुख के भाई एवं पुत्र शामिल है. मुम्बई के एक प्रमुख उद्योग घराने के दो भाइयों के द्वन्द के बाद हुई सुलह के बाद इस उलझन के सारे तार सुलझ गए है. कांग्रेस की एक सांसद जिनके पति इसी मुम्बई घराने के प्रमुख व्यक्ति थे और जिनका हाल ही में निधन हुआ है, मुम्बई में एक जमाने में मेरे अग्रज अमिताभ जी के काफी निकट रहे हबीब नाडियाडवाला, मेरे पुराने नेता के पुत्र के मित्र श्री रोहित सहाय , मायावती जी के सचिवालय के गौर वर्ण के लम्बे लहीम शहीम एक अधिकारी और इलाहाबाद के एक वकील धवन साहब इस पूरे षडयंत्र के जानकार है. मुझे फ़साने के लिए मेरी पुरानी पार्टी के एक पदाधिकारी को एक बार पांच करोड़ और दूसरी बार दो करोड़, कुल सात करोड़ दिए गए. उत्तर प्रदेश के एक स्थानीय नेता और एक वित्तीय कम्पनी में कार्यरत उनकी बिटिया और एक केन्द्रीय नेता की जानकारी में एक निश्चित मोटी राशि मेरे पुराने दल को एवं केन्द्रीय मंत्रिमंडल में शामिल करने के प्रस्ताव मेरे पुराने दल के नेताओं को देकर मेरे सियासी क़त्ल की साजिश का काम-काज हुआ.

झगड़ रहे दो उद्यमियों की सुलह के बाद षडयंत्रकारियों ने डर के मारे कम्पूटर साफ्टवेअर का सारा हार्डवेअर मुझे देकर इस रहस्य के सारे प्रमाण मुझे दे दिये है. कहते है कि दो बड़ों के झगड़ों में जो पडा वो मरा. अब यह दोनों बड़े मिल कर उन छोटों का हिसाब चुकता करेंगे जिन्होंने दोनों के झगड़ों की मलाई लम्बे समय तक खाई. अल्लाह! मेरी पुरानी पार्टी अब इस एकता के बाद, झगड़े का फ़ायदा कैसे उठाएगी? वो तमाम चेहरे जो मासूम बन कर घूम रहे थे अब बेनकाब हो चुके है. सभी झूठों और फरेबियों का मुह काला हो चुका है. फूट डालो, राज करो की निति बर्बाद हो गई है. मुझे इस बात का दुःख है कि मेरे पुराने नेता ने मेरे अपने परिवार के एक सदस्य को गुमराह करने की कोशिश की. बराए करम इस ब्लॉग का खंडन करने की जुर्रत कोई ना करे क्यूंकि अब जो मै लिख रहा हूँ, उसके प्रमाण मेरे पास है और अगर किसी “माई के लाल” ने कुछ कहा तो खुला प्रेस कर मै प्रमाण उजागर कर दूंगा. चौदह वर्षों तक जिस पार्टी को मैने अपने लख्ते जिगर से सींचा उसी पार्टी के लोगों ने साजिश की और मैने शुब्हा मायावती जी और कांग्रेस पर किया, मै शर्मशार हूँ. पुलिस भर्ती में जिस ईमानदारी से बसपा सरकार ने कामकाज किया है कि बिना सिफारिश के हर गाँव में पांच-छह भर्ती हुई है, उसके लिए मै बसपा सरकार को मुबारकबाद देता हूँ. अब जब तक मेरे सियासी रकीब चुप रहेंगे, मै चुप रहूंगा. यह मेरी उनसे मोहब्बतों और खुलूस का आखरी गीत है. आखरी जुमला अपने पुराने नेता से-

“इधर हमसे भी बातें आप करतें है लगावट की, उधर गैरों से भी कुछ अहदों पैमां होते जाते है.”

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