स्वर्गीय गुरूदत्त की अमर कलाकृति “प्यासा” में गीता दत्त जी का गाया कई दशकों पूर्व का यह गीत आज की आधुनिक राजनीति के सन्दर्भ में कितना सार्थक लगता है. पिछले दिनों समाजवादी पार्टी के शीर्ष नेतृत्व की कांग्रेस के शीर्ष प्रबंधकों से हुई घुटनाटेक मुलाकातों का पर्दाफ़ाश जब देश के टी.वी. चैनलों और समाचारपत्रों ने किया तो बवाल मच गया. समाजवादी पार्टी के नेतृत्व ने इसे कल्पना मात्र बताया. वामपंथी दलों और भाजपा समेत सभी विपक्षी दलों के संयुक्त निर्णय में सहमति के बाद विसंगति का प्रदर्शन मात्र ही इस तथ्य का धोतक था कि पुराने पहलवान की धोती ढीली हो चुकी है. ख़ैर समाजवादी कहते है कि सुधरो या टूटो. मै सुधारने वाला तो था नहीं इसलिए कई पुराने समाजवादी पुरोद्धाओं की तरह तोड़ा गया. समाजवाद का दूसरा सिद्धांत है कि कान्ग्रेसिओं के पराभव के लिए शैतान से भी हाँथ मिलाया जा सकता है. हाल ही में हुए लोकसभा चुनाव से पहले किस किस का हाँथ कहाँ कहाँ कैसे कैसे कब कब मिला सभी मुसलमान भाइयों ने देखा, जाना, समझा और फिर समझबूझ कर समाजवादी पार्टी से किनाराकशी कर ली. अब कोलकोता अधिवेशन में एक सवाल उठा अमर सिंह पार्टी में वापस आना चाहते है, लें या ना लें? मान्यवर, यह तो सच है कि मै पार्टी से गुर्दे के गंभीर प्रत्यारोपण की सर्जरी के बाद सिंगापुर से लौट कर साथियों और नेता की क्रूरता का यह वीभत्स अट्टाहास नहीं देखना चाहता थी. चाहा था कि “नफ़रत ही सही दिल को दुखाने के लियी आ, आ फिर से मुझे छोड़ के जाने के लिए आ”. लेकिन ना कोई आया, ना किसी ने मनाया और मुझे यह कहकर मायूसी से जाना पडा कि “बड़े बेआबरू हो कर तेरे कूचे से हम निकले”. मैने अपनी पुरानी पार्टी के नेतृत्व को फकत तीन बार फोन किया है. पहली दफा होली की बधाई के लिए, दूसरी दफे नेतृत्व के ख़ास मित्र एम्.सी.आई. के घोटाले वाले केतन देसाई की कुछ जानकारी के लिए और तीसरी बार यह बताने ले लिए आय से अधिक संपत्ति मामले में आपकी पूरी सेवा में लिप्त भाई श्री विश्वनाथ चतुर्वेदी सुप्रीम कोर्ट में हलफनामा देकर यह कहने जा रहे है कि महारानीबाग़ का मकान असल में उसमे रहने वाले का ही है और रहने वाला उस मकान को देश के एक बड़े घराने की गिफ्ट बता रहा है. जिन्दगी में असली चीज विधिक रूप से की गई लिखा-पढी है और लिखा पढी में यह मकान किसी घराने का नहीं, सपा सुप्रीमो का नहीं किसी व्यक्ति का नहीं बल्कि उस कंपनी की संपत्ति है जिसे प्रति माह पार्टी की और से एक रामगोपाल यादव हस्ताक्षरित दस्तावेज के अनुसार पांच लाख रूपए प्रति माह प्र्राप्त हो रहे है.

मुझे समाजवादी पार्टी से बेइज्जत होकर निकाले जाने का बेहद अफसोस है जो मेरी गंभीर बीमारी के कारण अमानवीय कृत्य भी है. पार्टी नेतृत्व का झूठ कि मुझे निकाला नहीं गया मै खुद भागा हूँ, झूठा साबित करने के लिए आज ब्लॉग में मै मेरे निष्काशन की लिखित चिट्ठी पुनः डाल रहा हूँ. मै समाजवादी पार्टी नहीं कि कांग्रेस को हारने के लिए शैतान से भी हाँथ मिलाना जायज है बोलते बोलते अब यहाँ तक पहुँच गए कि ममता की धरती बंगाल में जाकर कह आए कि “ममता जाओ क्यूंकि तुम्हारी खाली कुर्सियों पर अब हमारी नजर लग गई है. मेरी संस्तुति पर कई बार कहने पर भी भाई विजय उपाध्याय जी बंगाल समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष है, पर समाजवादी पार्टी ने उन्हें कुछ नहीं दिया. परन्तु उनकी पृष्ठभूमि की पूरी जानकारी के बावजूद ममता उन्हें कोलकोता पौर निगम का चुनाव लड़वा रही है. धन्यवाद सुश्री ममता जी! किसी के कहने से वह रेल मंत्रालय नहीं छोड़ने वाली और अब तो शर्म करें देश के प्रधानमंत्री आदरणीय मनमोहन सिंह ने अपनी पत्रकार वार्ता में स्पष्ट कर दिया कि कांग्रेस/सपा की कोई डील नहीं है. जनेश्वर जी के बाद कल वीरेंद्र भाटिया जी भी चले गए, मै समाजवादी पार्टी में हूँ ही नहीं. भाटिया जी की भी जगह बसपा ही भरेगी. अब यूं.पी.ए. को अपने बिल पास कराने के लिए राष्ट्रपति प्रतिभा पाटिल के चुनाव से ले कर कट मोशन तक लगातार सरकार का साथ देने वाली मायावती चाहिए या ढुलमुल प्रवत्ति के सुबहोशाम चहरे बदलने वाले हमारे पुराने नेता? यदि समाजवादी का बंगाल प्रांत का अध्यक्ष विजय उपाध्याय रातोरात तृणमूल के मूल में जा सकता है और श्री मुलायम सिंह अमर सिंह को निकाल सकते है. तो यूं.पी.ए. को वोट दे कर चलाने वाले दो मजबूत दल बसपा और तृणमूल कांग्रेस की नेत्रियाँ मायावती जी और ममता जी समाजवादी मंत्रियों के मंत्रिमंडल प्रवेश पर यदि इकठ्ठा चाय पी ले तो यह चाय उतनी ही महंगी हो सकती है जितनी सुश्री जयललिता जी और सोनिया जी की चाय अटल बिहारी वाजपेयी जी को महंगी पडी थी. अरे भाई समाजवादियों तुम्हारी तड़प और तरस देखी नहीं जाती, चुपचाप अपने दो सदस्य जिताओ, सानुरोध कांग्रेस को राजनैतिक प्रणय निवेदन करते हुए कहो कि “आजा पिया मोहे अंग लगा ले, जनम सफल हो जाए.”

आपके राजनैतिक विरह का सही मूल्यांकन होगा, कांग्रेसी आपके विरह और सत्ता के वियोग के दर्द को आष्वासन के लालीपाप से पूरा कर अपना एक व्यक्ति जो संभवतः सपा का और श्री दिग्विजय सिंह जी का साझा चहेता, हमारे और सपा के पुराने साथी, भाई प्रमोद तिवारी की राज्यसभा तक पहुचने की गहन अभिलाषा को संभवतः अबकी १७ जून को जरूर पूरा करेंगे. मुझे पूरा यकीन है कि समाजवादी पार्टी के दो उमीदवारों में एक मेरी भाभी श्रीमती जया बच्चन जरूर होंगी, आखिर देवर और पार्टी के बीच में उन्होंने पार्टी को चुनने का आदर्श कामकाज जो किया है. समाजवादी कांग्रेस को शैतान से बड़ा शैतान मानते रहे है, कई बार मैने इसीलिए सुना है कि कांग्रेस को ख़त्म करने के लिए भाजपा के फिरकापरस्त शैतान से भी मिलकर काम-काज जायज है. मेरे समाजवादी भाइयों आप बधाई के पात्र है जिसे ताउम्र आप बड़ा शैतान कहते रहे है आज उन्ही का समागम करके आप कृतार्थ है, जाएं उनके अंग संग लगे, अपना जनम सफल करें पर बराएकरम फिर अन्य विरोधी दल, वामपंथी साथी और भाजपा को गैर कांग्रेसवाद का थोथा नारा ना बताएं. वर्त्तमान राजनीति की एक अनूठी संस्कृति सुबह, दोपहर और शाम रंग बदलने की है, हम इस संस्कृति को “दादा शिबू सोरेन संस्कृति” के नाम से जानते है. गजब हो गया निति, सिद्धांत दलों के समर्थन एवं विरोध पर नितांत अस्थिर सियासत के भी मूल कथाकार और रचनाकार शिबू सोरेन है. झारखंड अवसरवादी राजनीति के दर्शन में उत्तर प्रदेश और बिहार को अपना पिछलग्गू बना गया. इस अनैतिक सियासत का भी नेतृत्व हमारा पुराना दल ना कर पाया. साथी वीरेंद्र भाटिया को उनके दुखद निधन पर श्रद्धांजलि. मै बेचारा अपने परिवार, बीवी, बच्चो और चंद बचे-खुचे हिमायातदारों के साथ खुश हूँ. शनि की साढ़ेसाती जाते जाते पुराने रिश्ते और घर तोड़ती है और बिलकुल नूतन अभिनव निर्माण रचाती बसाती है. हे प्रभो मुझे बख्श दे, छोड़ दे, कृपा करे-

“मुझे दर्दे दिल का पता ना था, मुझे आप किस लिए मिल गए,
मै अकेला ही मजे में था, मुझे आप किसलिए मिल गए,
सभी अपने-अपने सफ़र में गुम, कही दूर तुम कही दूर हम.”

और अंत में भाभी जया बच्चन जी को उनकी सफल राजनीति की बधाई अग्रिम रूप से देता हूँ.

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