आदरणीय नेताजी, आपसे और अखिलेश से मैने संपर्क करने की बहुत कोशिश की पर किन्ही कारणों से हमारी बात फ़ोन पर नहीं हो पायी इसलिए मजबूरन मुझे यह सन्देश आप तक ब्लाग के जरिये पहुँचाना पड़ रहा है. मुझे पिछले कुछ दिनों के घटनाक्रम को देख कर अहसास हो रहा है कि यदि कोई भी अच्छा काम होता है तो उसका सारा श्रेय औरो को दे दिया जाता है परन्तु कुछ खराब होने पर सारा का सारा इल्जाम मेरे सर पर आ जाता है. पार्टी के कुछ नेताओ ने मुझ पर इल्जाम लगाया है कि पार्टी में फ़िल्मी सितारों और उद्योगपतियों की चकाचौंध मेरी वजह से आयी है और समाजवाद के मूल्यों के पतन का जिम्मेदार भी मै ही हूँ. इस सारे प्रकरण में जिस बात को मुद्दा बनाया जा रहा है वह बात मैने की ही नहीं है. आपसे बेहतर कौन जनता है कि मेरा इस्तीफ़ा कोई राजनैतिक नहीं बल्कि सिर्फ एक व्यक्तिगत फैसला है.  कुछ पत्रकारों ने मुझसे पूछा कि क्या नेताजी का भी कोई राज मेरे पास है तो मैने उत्तर दिया कि हम दोनों ने एक दूसरे के साथ कई चीजो में विशवास की हिस्सेदारी की है, इस विषय में न वह कुछ बोलेंगे और ना ही मै कुछ कहूँगा. आप विशवास कीजिये की यह सब मेरे सीने मेरी अंतिम सांस तक दफन रहेगा. मुझे पता लगा है कि मेरे इस कथन को भी भाई राम गोपाल ने मुद्दा बना दिया है. वह मुझे मानसिक रूप से वह मुझे बीमार मानने लगे है, मै मानसिक रूप से तो नहीं पर शारीरिक रूप से अवश्य बीमार हूँ और उसी वजह से मैने छुट्टी मांगने का अपराध किया है. उसकी जो सजा चाहे आप लोग मुझे देदे. लगातार हो रहे इस सार्वजानिक अपमान के बाद मेरा ”सैफई महोत्सव” में आना उचित नहीं होगा. आपका आदेश न मान पाने के लिए मे दुखी और क्षमाप्रार्थी हूँ.
आपका पुराना कृपाकांछी सेवक
अमर सिंह

 

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