मेरे प्यारे ब्लागर परिवार के साथियों, आज मै पहली बार हिंदी में लिख रहा हूँ.  मेरे इस्तीफे पर बहुत प्रतिक्रियाए हुई, रुग्ण  पड़े श्री ज्योति बसु की चिंता मीडिया को ज्यादा करनी चाहिए. केंद्र और राज्य दोनों में सत्ता से बाहर एक गैर यादव दोयम दर्जे के राजनैतिक कार्यकर्ता का जिक्र मीडिया  छोड़ दे. कडकडाती सर्दी में भारी संख्या में एकत्र मीडिया वालो से कल दिल्ली न पहुच पाने के लिए मै तहेदिल से माफी मांगता हूँ. मैने पार्टी की सदस्यता नहीं छोडी है. पार्टी के नेता मुलायम सिंह जी और इनके परिवार के बारे में मैने एक भी शब्द नहीं कहा है.  हाल में मौत के मुह से गुर्दे के प्रत्यारोपण की सर्जरी से अपने मित्रो बच्चन परिवार, अनिल और टीना अम्बानी, अपनी पत्नी और हजारो अनदेखे शुभचिंतको की प्रार्थना से बचने के बाद ईश्वर  ने मुझे जीवन का सत्य बताया है.

बुजुर्ग कहते है कि पहला सुख निरोगी काया, दूसरा सुख पास में माया, तीसरा सुख सुन्दर नारी, और चौथा सुख संतान हो आज्ञाकारी. केरल के ईसाई परिवार में जन्मे एक नवजवान जिसके दो छोटे अबोध बच्चे है, ने बिना मांगे अपना गुर्दा दे कर मेरे पीछे जयजयकार लगाने वाली भारी भीड़ को  बहुत ही बौना बना दिया  है और धर्म निरपेक्षता में मेरे विशवास को और गहरा किया है. हिन्दू, मुस्लमान, ईसाई में अगर अंतर होता तो हिन्दू अमर सिंह के शरीर में ईसाई का गुर्दा फिट नहीं बैठता.

खून की उल्टिया, बेहोशी की हालत, खाने का न पचना, रात को सोते में डायलिसिस करा कर सुबह लोकसभा चुनाव में प्रचार के लिए  निकल पड़ना एक पागलपन था.   इसकी शुरुआत बरेली की रैली से पिछले विधानसभा चुनाव के दौरान हुयी थी. बरेली में मेरे प्रबंधन में श्री चंद्रबाबू, सुश्री जयललिता, श्री ओमप्रकाश चौटाला, श्री बंगारप्पा, श्री फारुख अब्दुल्ला पहुंचे थे और उसी  रात मेरी सर्जरी नॉएडा के फोर्टीस अस्पताल में चलती रही. रात भर अस्पताल में आपरेशन के बाद, सुबह हाँथ में लगे सलाइन को नोच कर मै बरेली पहुंचा. यह बात नेताजी को यह पता है.

आदरणीय जनेश्वर बाबा के ख़ास चेले मेरे साथी ब्रजभूषण तिवारी कहते है कि  अमर सिंह को हमने बनाया और अब  वह बहुत नखरा करते है. ब्रजभूषण भाई आपका बहुत शुक्रिया कि आपने मुझे बड़ा बनाया, मौका है आप खुद बड़े बन जाइये. बहुत अधिक बीमार जनेश्वर बाबा संसद में जाते ही नहीं, क्या मै आंकलन करू वह नखरा करते है, बिलकुल  नहीं. जनेश्वर बाबा मात्र अपने स्वस्थ के प्रति सजग है. मै महाराष्ट्र में था, फोन की घंटी बजी, बताया गया कि भोपाल में जनेश्वर बाबा गंभीर है. समाजवाद के इस पुरोद्धा की जान को बचाने के लिए धीरू भाई/मुकेश/अनिल (तब सभी साथ थे) के जहाज को भोपाल भेज कर दिल्ली में डॉ प्रताप रेड्डी को कह कर सारी  व्यवस्थाये इसी छोटे  पूंजीवादी सेवक ने की थी.

पिछले राज्यसभा चुनावो में बाबा जनेश्वर को चुने जाने में विधायको की कमी थी, कम पड़ गए विधायको का जुगाड़ करके जनेश्वर बाबा को जिताने का दाईत्व भी इसी पूंजीवादी  सेवक के सर पर था. बाबा ने कहा, अमर सिंह समाजवादी बनो मुलायमवादी  नहीं. मेरी गलती है की मै मुलायमवादी ज्यादा रहा क्यूँकी मैने लोहिया की सप्तक्रांती पढी तो है पर उन्हें देखा नहीं है. आप लोहियावादी है और में मुलायमवादी अब तक हूँ.

हमारे दूसरे साथी मोहन सिंह का तीखा बयान आया है कि पार्टी कमजोर हुयी है.सपा आज भी देश की तीसरी सबसे बड़ी पार्टी है, हां मोहन भाई आप जरूर अपने चुनाव में तीसरे नंबर पर आये. जागरण के अपने एक लेख में आपने राजबब्बर के व्यक्तित्व को मुलायम सिंह बड़ा बताया था और बनारस की एक गोष्ठी में पिछले दिनों और हाल के अपने एक बयान में आपने आरोप लगाया कि मै अपने पूंजीवादी मित्र अनिल मबानी के हितो की रक्षा न कर पाने के कारण दूर हो रहा हूँ. पहले बताइए कि  क्या लोहिया जी के हैदराबाद के मित्र श्री बद्रीविशाल पिट्टी पैसे वाले नही थे और क्या कलकत्ता के श्री जगदीश गुप्ता का परिवार पैसे वाला नहीं था? क्या गाँधी, बजाज और बिरला परिवार के नजदीक नहीं थे? ठीक है मै टाटा या अम्बानी नहीं लेकिन गरीब भी नहीं हूँ. और अब तो मायावती कि कृपा से चल रहे आर्थिक मामले के मुकदमे से यह अदालत में खुले आम आ गया है कि मेरी सारी आर्थिक सम्पदा हमारी सपा  की सरकार बनने से पूर्व ही कानूनन खाते में आ गयी थी, और २००३ में सत्ता में आने के बाद मैने कुछ नहीं किया. मोहन भाई मै न तो मायावती हू और न ही मधु कोड़ा. और हां लन्दन में आप बीमार जाते हुए इसी पूंजीवादी सेवक से कुछ ले कर गए थे और चुनावो  में भी गिड़गिडाते  हुए एक बड़ी रकम मुझसे ले गए. इस बात का खुलासा आपने कुछ दिनों पूर्व सार्वजनिक रूप से किया था. आप बड़े भाई है पूंजीवाद से पीड़ित है, यह सब मुझे लौटा कर मुझे ठीक से गलिया दीजिये. जनेश्वर बाबा राज्यसभा संसदीय दल के नेता है पदपर बने हुए है पर बीमारी के कारण काम नहीं करते है. मै उनसे ज्यादा गंभीर रूप से बीमार हूँ, हाँथ जोड़ कर छुट्टी मांग रहा हूँ. विधान परिषद् चुनावो में उपलब्ध नहीं हूँ, इसलिए पद पर मै मुफ्त में नहीं रहना चाहता हूँ तो क्या मै समाजवादी से पूंजीवादी हो गया?

दिग्विजय सिंह मेरे मित्र है, मुकेश के ख़ास ठीक वैसे ही है जैसे कि अनिल मेरे मित्र है. लेकिन एक अंतर है, अनिल मुझे चलाते  नहीं लेकिन मुकेश आपको चलाते है. उत्तर प्रदेश में सीटो के बटवारे की चर्चा के दौरान आपने कहा था  my relation with mukesh is non-negotiable और मैने कहा था, with anil, there is no exisiting political relationship.

मैने अपने जीवन के इस महत्वपूर्ण निर्णय पर अपने किसी भी  निकट के व्यक्ति से कुछ नहीं पूछा है, चाहे वह अपनी पत्नी हो, या जया बच्चन, या जया प्रदा, या संजय दत्त, या अमित जी, या फिर अनिल इत्यादि, क्यूंकि यह मेरा जीवन और यह मेरा निर्णय है. विश्वास कीजिये अभी तक इसमे कोई राजनीति नहीं है. लेकिन पानी की तरह इस बेरंग निर्णय में जनेश्वर जी, मोहन सिंह, ब्रिज भूषण और राम गोपाल भाई राजनीति का रंग डालना चाह  रहे है तो  फिर यह होना ही है.

अंतिम बात, फिरोजाबाद उप-चुनाव में प्रचार के बाद मेरे नीचे उड़ रहे हेलीकाप्टर को देख कर नेता जी के ख़ास साथी बलराम यादव के ख़ास श्री रामासरे विश्वकर्मा ने कहा कि काश यह लड़ जाता और ठाकुर साहब मर जाते ताकि पार्टी बच  जाती. बाद में एक पंचायत में श्री अनिल राजभर जो कि पार्टी के युवा संगठन के अध्यक्ष है ने इस बात की पुष्टि भी की. विश्वकर्मा तुरंत निष्काषित हुए. शाम तक रामगोपाल भाई मेरे घर पहुच कर उसे पार्टी में वापस लाने की पेशकश कर गए. मैने विश्वकर्मा जी से मेरे कारण निष्काशन की माफी मांग ली. रामगोपाल भाई  मै आपसे एक आखरी सवाल पूछता हूँ.

आंसू समझ कर आँखों से तुमने मुझे गिरा दिया,

मोती किसी के प्यार का मिटटी में क्यूँ मिला दिया.

मै दुबई  छोड़ चूका हूँ, मुसाफिर हूँ पता नहीं अगले पड़ाव में कब, कहा, कैसे  और किस हाल में मिलूँगा. मोहन सिंह जी सत्ता में रहते हुए हमने दादरी की जमीन अनिल अम्बानी को प्रदेश के विकास के लिए दी थी. वह अदालत ने छीन कर आपके मुझ पर लगाये गए  आरोप को भी अप्रासंगिक कर डाला है. आलोचना का कोई नया बिंदु खोजिये.

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