राजीव जी के स्मृति स्थल पर सोनिया जी के साथ-साथ बहन सुषमा को देख कर अच्छा लगा. सुषमा जी मुझे बहुत स्नेह करती है चाहे मिलना कम ही क्यों ना हो, उनके पति पूर्व समाजवादी नेता श्री स्वराज कौशल तो बड़े भाई की तरह ध्यान रखते है. नेहरू जी के समय की राजनीति में पीलू मोदी, डॉ राममनोहर लोहिया, श्री मधु लिमए, श्री प्रकाशवीर शास्त्री और कांग्रेस के अन्दर श्री फिरोज गांधी अपनी बातो को द्रढता से रखते थे और संसद के सेन्ट्रल हाल में कुछ इस तरह मिलते थे जैसे की कुछ हुआ ही ना हो.

सत्तर के दशक में आपात स्थिति के बाद की राजनीति में विरोधी दुश्मन हो गए, शुरुआत चाहे कांग्रेस ने की हो, बड़प्पन जनता पार्टी के नेताओं ने भी इंदिरा जी के प्रति नहीं दिखाया. तमिलनाडु, उत्तर प्रदेश और अब पश्चिम बंगाल लोकशाही की राजनीति में विरोधी नहीं परस्पर जानी दुश्मन की तरह की राजनीति के नए अखाड़े है. सुश्री जयललिता और करूणानिधि जी, बुद्धदेब बाबू और ममता जी, सुश्री मायावती जी और मुलायम सिंह जी “हम विरोधी नहीं, जानी दुश्मन है” वाली राजनीति के परिपोषक है. जिस तरह समाजवादी पार्टी के प्रवक्ता के रूप में मैने श्री मुलायम सिंह के आदेशों की आपूर्ति करते हुए, सोनिया जी के बारे में उदगार व्यक्त किये थे, उसके बाद तो मेरा और उनका संवाद ही नहीं होना चाहिए था. लिट्टे से नजदीकी के बावजूद डी.एम्.के. को साथ लेना, कांग्रेस की पीठ में छूरा भोंक कालान्तर में विदेशी मूल का मुद्दा दल के अन्दर उठाना, यह सब सुकर्म करने के बाद भी यदि श्रीमती सोनिया गाँधी आदरणीय शरद पवार जी के साथ केंद्र और राज्य दोनों जगह साथ है तो निश्चित रूप से कलकत्ता पौर निगम के सामान्य विवाद को परे रख कर ममता को भी साधने की सलाहियत उनमे है. ममता गई और हम आए, मन का लड्डू समाजवादी काफी फोड़ रहे है, वैसे भी मुलायम सिंह जी को सीटी बहुत पसंद है. आज के माहौल में यदि कांग्रेस की राजनैतिक सीटी बजे तो बगैर मुलायम सिंह के कई सांसद और विधायक कांग्रेसी खेमे और बचे खुचे बसपा में यानी हाँथ और हांथी के साथ नजर आएँगे. मै लोकमंच के अपने समर्थकों से और अपने पुराने नेताओं से करबद्ध प्रार्थना करूंगा विशेष रूप से श्री मोहन सिंह और भाई रामगोपाल जी से कि राजनीति में बेशरम, कमीना, कुत्ता, पागल जैसी भाषाओं का प्रयोग आपको रसातल में ले जाता है. कुछ ना हो तो सुषमा स्वराज जी से ही सीखिए विरोधियों के साथ शालीन कैसे रहते है. विरोध यदि वैचारिक हो तो व्यक्तिगत कटुता क्यों?

“कहते है मेरे दोस्त मेरा हाल देख कर, दुश्मन को भी खुदा ना करे मुब्तिलाए इश्क”

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