श्री भैरो सिंह शेखावत जी को मैने बहुत ही नजदीकी से देखा, समझा, और जाना है. मेरी उनकी पहली मुलाक़ात श्री ललित मोदी के विवाह के दौरान उस समय हुई थी जब वह राजस्थान के मुख्यमंत्री थे और ललित मोदी उस समय भी भाजपा नेत्री वसुंधरा राजे के विशेष स्नेही थे. धीरे-धीरे यह छोटी मुलाक़ात घनिष्टता में बदलती गई. अटल जी उनके काफी नजदीक थे और इस नाते उनकी दत्तक पुत्री और जमाता रंजन भट्टाचार्य जो मेरे भी मित्र है, उनके प्रति विशेष आदर भाव रखते थे. स्वर्गीय चंद्रशेखर जी मुझसे काफी स्नेह रखते थे और स्वर्गीय शेखावत जी और चंद्रशेखर जी में स्नेह का अटूट बंधन था. राज्यसभा में उपराष्ट्रपति की हैसियत से अध्यक्ष बने भैरो सिंह जी को मै हमेशा पोप कह कर बुलाता था. मै हँसी मजाक में कहता था हुकुम आप हम क्षत्रियो के पोप हो, वह तुरंत कहते थे यार तुम पोप बनो या ना बनो बिरादरी के होप एक दिन जरूर बनना. निर्दलीय सांसद पूर्व केन्द्रीय मंत्री श्री दिग्विजय सिंह उनके निकटतम लोगों में थे और भाजपा सांसद श्री यशवंत सिन्हा, श्री शत्रुघ्न सिन्हा, दिग्विजय सिंह जी और मै कभी-कभी मिल बैठ कर अच्छी शामें गुजारते थे. एक बार पत्रकार मित्र प्रभु चावला के निवास पर श्री अरुण पुरी, मै, तत्कालीन प्रधानमन्त्री माननीय अटल जी, श्री ब्रजेश मिश्र जी और भैरों सिंह जी घंटों बैठे सहज भाव से बतियाते रहे. इन अन्तरंग क्षणों ने उनमे यह अनुभूति उत्पन्न कर दी कि मै उनका सच्चा समर्थक हूँ और जब वह राष्ट्रपति पद के उम्मीदवार बने तो मान बैठे कि मेरा समर्थन तो उन्हें मांगना ही नहीं है. व्यक्तिगत रूप से मै उनका बहुत आदर करता था पर वाह रे राजनीति की क्रूरता हमारे तत्कालीन समाजवादी दल ने उनकी भाजपाई पृष्टभूमि का हवाला देते हुए उनका समर्थन ना करने का निर्णय लिया. सच ना कहना बेमानी होगी, श्री मुलायम सिंह जी भी उनका बहुत आदर करते थे. हमारे विरोध को काफी व्यक्तिगत रूप से ना लेते हुए उन्होंने सदैव अपना स्नेह मेरे प्रति यथावत रखा और मेरी गुर्दे की बीमारी से बेहद चिंतित रहे. राजनैतिक विरोध को दरकिनार कर ऊपर उठना यदि सीखना हो तो इसके ज्वलंत उदाहरण आदरणीय भैरों सिंह जी थे.

हालांकि मुलायम सिंह जी कहते थे कि अमर सिंह हम आप के बगैर भी दो बार मुख्यमंत्री बने थे. बिलकुल सही पहली बार श्री विश्वनाथ प्रताप सिंह जी और दूसरी बार श्री कांशी राम जी की बैसाखी लगी थी. लेकिन तीसरी बार का सबसे लंबा मुख्यमंत्रित्व काल विधायको के जुगाड़ से प्रबंधन तक बिना भाई शिवपाल यादव के और बिना मेरे, भैरो सिंह और प्रमोद महाजन के व्यक्तिगत सम्बन्धो के संभव ही नहीं था. भाजपा के अधिकाँश नेता राष्ट्रपति शासन के पक्ष में थे. मुलायम सिंह जी को मुख्यमंत्री बनाने की अपेक्षा राष्ट्रपति शासन को वह अधिक उपयुक्त मानते थे. ईश्वर दो स्वर्गारोही आत्माओं को मुक्ति दे, यह प्रार्थना करते हुए मै स्पष्ट मानूंगा कि मेरे कहने पर भैरो सिंह जी और प्रमोद महाजन जी ने अटल जी को विश्वास मत प्राप्त करने के लिए मात्र एक दिन का अवसर देने को तत्कालीन राज्यपाल श्री विष्णुकांत शास्त्री को कहलवाया था. और वो एक दिन श्री मुलायम सिंह के मुख्यमंत्रित्व के साढ़े तीन साल में कांग्रेस आदि सभी दलों के सहयोग से तब्दील हो गया. मै भैरो सिंह जी की स्मृति, व्यक्तित्व और कृतित्व को नमन करते हुए जाने अनजाने उनके प्रति मेरे द्वारा किए गए अन्याय को स्वीकारता हूँ.

“भरी बज़्म में राज की बात कह दी, बड़ा बेअदब हूँ सजा चाहता हूँ”.

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