जर्फ़ यानि मर्यादा की परिभाषा असीमित है. सिंगापुर मेरी जीवनधारा का एक स्रोत बन गया है. इसी सिंगापोरे में कई मास के प्रवास में श्री अमिताभ बच्चन जी ने ब्लागिंग के आदत डलवा दी थी, सुना है कि अब वह “ट्वीट” करते है. बुद्ध ने जैसे बोध गया में आत्ममंथन कर ज्ञान प्राप्त किया वैसे ही टहलते हुए सिंगापुर के उद्यानों में पता चला कि मै कौन हूँ? एक राजनेता अथवा एक परिवार के सभी सदस्य जो राजनीति में है उनकी गलत-सही इच्छापूर्ति के सियासी चिराग का “जिन”? परिवार अब भी है, सियासी चिराग पार्टी की शक्लोसूरत में बदस्तूर कायम है सिर्फ एक अदद जिन यानि मै गायब हो गया हूँ.

मेरी पुरानी पार्टी के मुखिया की मसें चम्बल का पानी पी-पी कर चढी है. अपहरण इस इलाके में एक जाना-माना पेशा है और अपहृत व्यक्ति को लोग “पकड़” के नाम से जानते है. जर, जोरू, जमीन के लिए मर जाना और मार डालना यहाँ आम बात है. क्षत्रियों में आपसी खूनी रंजिश पुश्त दर पुश्त चलती है. यादव भाई युवा वैधव्य को परिवार में कही ना कही सुहाग से जोड़ कर समझौता कर लेते है. सामाजिक स्तर पर यह चाहे जितने उदारमना हों परन्तु राजनैतिक स्तर पर कतई समझौता पसंद नहीं. यही उनकी ताकत और कमजोरी दोनों है. स्वयं हमारे पुराने पहलवान नेता एक बड़े परिवार को पीछे कर आगे बढे है. कमांडर अर्जुन सिंह भदौरिया इनकी पत्नी श्रीमती सरला भदौरिया ने समाजवादी विचारों की लालिमा और लाल टोपी से पूरे इटावा क्षेत्र को राजनैतिक उर्वरा दी थी. श्री मुलायम सिंह इनकी वरिष्ठता के खौफ से इनके जर्फ़ में थे. नत्थू सिंह के परिवार ने एवं श्री रामसेवक यादव ने भी पिछड़ी राजनीति में इन्हें आगे बढ़ाया. फिर यह चौधरी चरण सिंह के इतने बड़े मानस पुत्र बने कि तत्कालीन संगठन के नियमों की ऐसी तैसी करके चौधरी साहब ने इन्हें पूरे उत्तर प्रदेश संगठन का प्रमुख और नेता विरोधी दल दोनों दोनों ही पदों से नवाजा. उस समय राजेन्द्र सिंह, सतपाल मलिक, के.सी. त्यागी, शरद यादव जैसे लोग भी चौधरी साहब के बड़े दरबारियों में थे और नेताजी इन सबके साथ-साथ सरोज जी जो चौधरी साहब की पुत्री है, उनके दामाद अशोक सिंह को भी मैनेज रखने की कला के महारथी रहे. एक मौक़ा तो ऐसा आया कि नेताजी के परिवार का सबसे पढ़ा-लिखा आदमी जो प्रोफ़ेसर भी है, सांसद भी है, चौधरी साहब का निजी अंगरक्षक बन अपनी कारबाईन से उनकी रखवाली भी करने का सौभाग्य ग्रहण कर चुका है.

शातिर सियासत सिर्फ दलीय मकाम पर यही नहीं रुकी. “खून लो तो खून दो” की संस्कृति में इटावा बेल्ट में कांग्रेस के बलराम सिंह यादव और प्रतिपक्ष के श्री मुलायम सिंह यादव के समर्थकों में कितनी लाशें, कितनी विधवाओं की उजड़ी मांगे और माँओं की सूनी गोदें तलाशी जाएँ, इस काम के लिए हमारी पुलिस तो क्या लन्दन का स्काटलैंड यार्ड और अमेरिका का FBI भी छोटा पड़ जाएगा. बाद की बड़ी राजनीति में चंद्रशेखर, कामरेड सुरजीत जैसे लोग मिलते गए और आप प्रधानमन्त्री बनते-बनते रह गए.

जिस घर की रखवाली आपके भाई ने अपनी कारबाइन से की, उस घर के नौनिहाल चौधरी के बेटे से आपने उसके पिता के खौफ का जर्फ़ तो रखा परन्तु पिता के ऊपर जाते ही वारिस को अयोग्य करार कर अजित सिंह जी से ही लड़ कर आगे बढे और “पीछे मुड़कर नहीं देखा”. नेता जी की बहू के लिए जब मै अजित सिंह जी से मिला और पूछा भाई साहब डिम्पल ने क्या बिगाडा है? डिम्पल आपके घर की क्या लगी? चौधरी अजित सिंह खड़े हो गए और बोले, मुलायम सिंह ने भई जो किया हो डिम्पल बेचारी तो मासूम है और मेरी बनती भले ना हो, है तो मुलायम मेरे पिता की सियासी परम्परा और परिवार के और इस नाते डिम्पल हमारी बहू हुई. यार तुम कमाल हो, डिम्पल के लिए मेरा बेटा जयंत जाएगा. राजा भदावर की पत्नी मेरी पत्नी की रिश्तेदार है, इस लिए मेरी भी रिश्तेदार हुई. सपा सरकार में उन पर जम कर गुंडई हुई. अबकी जब मैने पति-पत्नी को डिम्पल का प्रचार करने को कहा तो कहने लगे, हुकुम जे बताऔ- चंद्रशेखर जी को न हुऔ, कमांडर अर्जुन भदौरिया को न हुऔ, आपकौ हुकुम जे न हुऔ, तो फिर मेरा क्या होगा? ख़ैर उन्हें भी मैने नेताजी के साथ फंसा दिया. बलिया विधान परिषद की सीट चंद्रशेखर जी के नाती को दिलवाने सपा की सम्पूर्ण क्षात्रिय लाबी चंद्रशेखर जी सपुत्र श्री नीरज शेखर के साथ मेरे पास आई. मैने राजा भईया, अरविन्द सिंह गोप, नीरज शेखर, जसवंत सिंह सबसे कहा मुझे इसमे ना उलझाओ, पर वे नहीं माने. नेता जी के घर पर सभा हुई, सम्पूर्ण यदुकुल ने सामूहिक विरोध कर पप्पू का नाम कटवा डाला. मैने तीन बार मुलायम सिंह जी से कहा कि मुख्तार अंसारी के लोगों को टिकट दे रहे है, यह हार जाएगा. सुनी अनसुनी हो गई. सच चाहे कड़वा हो, हारा और जाति विजयी हुई. मेरा श्री मुलायम सिंह को वह अंतिम प्रणाम था, खौफ का जर्फ़ नहीं, बल्कि रिश्तों के जर्फ़ का अहसासी दर्द.

मै नहीं चाहता श्री मुलायम सिंह मरें, हाँ सियासतदा मुलायम सिंह जी की सियासत जो अपराधी समर्थक, अंगरेजी विरोधी, कंप्यूटर विरोधी, कृषि में ट्रैक्टर के सदुपयोग विरोधी, पूर्वांचल विरोधी है, उसका सियासी इंतकाल जितनी जल्दी हो बेहतर है क्योंकी ऐसी सियासत देश, समाज और मुल्क को कही नहीं ले जाती, ऐसी सियासत जो ना तो भाजपा की भांति ईमानदार फिरकापरस्त है और नाही अपने ही घोषित कार्यक्रमों के प्रति ईमानदार, निशानी साक्षी महाराज और कल्याण सिंह जी है. ऐसी सियासत जो अपने कुटुंब और आसपास के जिलों के इतर पूर्वांचल में अपने बिरादरी को भी नहीं जानती, इसीलिये मैने कहा-

“आपन माटी आपन देश, आपन मुलायम आपन अखिलेश”

फिर भी व्यक्तिगत रूप से अपने बुजुर्ग और एकाकी चम्बल के बूढ़े दंतहीन शेर को मै याद दिलाते हुए कहूँगा कि CBI तो जब आप रक्षामंत्री थे तब भी जोगेन्द्र सिंह जी के नेतृत्व में लगी थी. CBI तो तब भी लगी थी जब अटल जी प्रधानमंत्री थे, मै और आप उनसे मिले भी थे और उन्होंने कहा था कि “दाल में कुछ काला है”. चाहे आप रक्षामंत्री रहे हो चाहे भाजपा का शासनकाल CBI दोनों दौरों में सीधी बिजली गिरा रही थी, यह तो आपके बोलने के खौफ का जर्फ़ है कि कम से कम अबकी बार सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद भी CBI अब तक आप तक नहीं पहुँची. पहले आप और CBI के बीच तब के प्रधानमन्त्री देवगौडा और फिर आपके और CBI के बीच तबके प्रधानमंत्री श्री अटल बिहारी बाजपेयी. इस UPA-१ के मुखिया आदरणीय मनमोहन सिंह आज के CBI और आपके बीच कही नहीं अगर कोई है तो सुप्रीम कोर्ट, हिम्मत हो तो ललकारिये सुप्रीम कोर्ट को; “जिसने कभी ना झुकना सीखा उसका नाम मुलायम है”.

जिंदगी भर घर-बाहर सब और जो किया फिर कीजिए. वीर बहादुर सिंह जी के अनाथ परिवार को मकान अलाट करना भी आप भूल गए? उनका बेटा फतेहबहादुर आज मायावती जी का मंत्री है. मुझसे कहते कहते थक गया मेरे पिता मरे है, उनके अहसान नेताजी पर नहीं. काम लेना, भूलना, छोडना, फिर मुड़कर नहीं देखना; कई शिकार है, इसलिए हां कबूल करता हूँ कि मेरा जीना इतना जरूरी नहीं नेता जी जितना आपकी सियासत का मरना और जीते जी आप द्वारा उस मौत को खुद देखना. अतएव आपकी जिंदगी को मिले मेरी भी उमर.

मेरी मुम्बई में एक मशहूर बहन है, मेरी खबरों खैरियत में साथ होती है कुछ पुराने साथियों के साथ उन्होंने भी आपकी सिफारिश की कहा उनके गुनाह माफ करो. आप बड़े लोग है, कोई माफी मांगे तभी तो कोई माफ करे. आप जो करे कहे सही हम जो सोचे समझे गलत, बहन ने पहली बार भाई से जोर से कुछ माँगा है पर माफी आपने माँगी नहीं, मेरे एक दूसरे परिवार के सदस्य ने भी नहीं माँगी. चलिए एक वादा है, राजनीति और उसूलों की अलग बात है, आज इसी लम्हे से अपनी इस बीमारी के दौर में मैने अपने दिल की सर्जरी की और अपनी मोहब्बतों और नफरतों के तलपट से आपको अपनी तरफ से आज़ाद किया. एक अंगरेजी जुमले से खत्म करता हूँ. अंगरेजी के आप एक ऐसे वाहिद टीचर है जिसे अंगरेजी नहीं आती, बेटे या भाई से समझ लीजियेगा.

I used to think that most painful thing in life is loosing the one you value the most but I have realized the most painful thing is loosing yourself in process of valuing some one so much who is so non-deserving. My love to all my erstwhile non-deserving friends for setting me free from their all kinds of burdens and responsibilities. May God give them sense.

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