आज मै बहुत दिनों के बाद सिंगापुर के अपने होटल के कमरे के बाहर के लान में बैठ कर सिंगापूर के सौन्दर्य को निहार रहा था, तभी मुझे तीन चार गिलहरियाँ दिखाई दी सबका रंग अलग-अलग था क्योंकि सभी आस-पास तो थी परन्तु अलग-अलग रंगों के परिवेश में भ्रमणशील थी. पता नहीं इन बहनों को बहुरंगी रंगों में रंगा देख कर मुझे उत्तर प्रदेश राज्य सभा चुनाव के प्रत्याशी मोहन याद आ गए. मोहन पुराने समाजवादी है जो पुराने समाजवादी नेता स्वर्गीय उग्रसेन के इर्दगिर्द घूमा करते थे. उग्रसेन जी के जीवनकाल में ही थोड़ी-बहुत स्वतंत्र सियासी हैसियत बना कर उनसे कुछ अलग-थलग हो लिए. आज भी स्वर्गीय उग्रसेन की बीमार बेटी जीवित है लेकिन उग्रसेन जी के नाम पर सियासत चमकाने वाला मोहन लोकसभा चुनाव में हार के तीसरे पायदान पर भी पहुँच कर राज्यसभा जा रहा है और उग्रसेन जी के परिवार की सुधि लेने वाला कोई नहीं है.

मुझे कल किसी ने मोहन का एक पुराना बयान और उसका कैसेट दिया और सुनाया जिसमे मोहन स्वर्गीय विश्वनाथ प्रताप सिंह जी का जयकारा और श्री मुलायम सिंह जी की लानत मलामत करते हुए चीख-चीख कर चिल्ला कर कह रहा है कि मै मुलायम की यादवी राजनीति का विनाश कर दूंगा. यह उस समय की बात है जब मोहन से अपना चरण स्पर्श कराके श्री मुलायम सिंह जी ने उसे विधान परिषद् का सदस्य बना दिया था. पिछले लोकसभा चुनावों में फिल्म कलाकारों को आज नचईया कहने वाला मोहन कैसे उनका स्वागत करने को आतुर व्याकुल था, इसका भी वीडियो कैसेट जिसमे मोहन मेरे साथ-साथ जया प्रदा जी, जया बच्चन जी, संजय दत्त जी की अराधना स्तुति एवं वन्दना कर रहा है, मोहन को बहुत प्यार करने वाले ने आज मुझे पकड़ा दिया. यह वही मोहन है जो जया बच्चन जी को नुमायशी सामान और श्री अमिताभ बच्चन जी को श्री नरेन्द्र मोदी का चप्पू बताते अब नहीं थकता है. यह वही मोहन है जो चुनावी सभा में तो मेरी चापलूसी कर रहा है और समाजवादी प्रवक्ता की हैसियत से मुझे बेशरम और कमीना कह रहा है. यह वही मोहन है जो अखिलेश की पत्नी डिम्पल के फिरोजाबाद हारने पर जागरण अखबार में पार्टी नेतृत्व की आलोचना करते हुए राज बब्बर जी के विलक्षण व्यक्तित्व की प्रशंसा करते नहीं थकता. यह वही मोहन है जो लोकसभा चुनाव के लिए मुझसे पैसा लेकर बनारस की एक गोष्ठी में स्वयं दुखी हो कर मुझसे पैसा लेने की बात उजागर करता है और उसके दुःख से द्रवित मै जब कहता हूँ कि हे दुखी मोहन लौटा दो दिया हुआ मेरा पैसा तो पगला जाता है. यह वही मोहन है जो मुझसे पैसा ले कर अपना इलाज कराता है, फिर गरियाता भी है. यह वही मोहन है जो सिनेमा वालों के पार्टी प्रवेश के अपराध में मेरे निष्काशन करने की घोषणा करता है फिर कुछ दिनों बाद जया बच्चन जी की उम्मीवारी की भी घोषणा करता है.

मुलायम सिंह जी सब जानकर लम्बी साँसे लेकर बतातें है, सब ठीक है, सब पता है, लेकिन करें क्या, मधु लिमए जी इसे मेरे पास छोड़ गए है, तो झेल रहा हूँ. यह वही मोहन है जो कहता है, बीमार हूँ राज्य सभा कैसे जाउंगा और जया बच्चन जी के मना करते ही अगिया बेताल बनकर विक्रमादित्य की तरह अपने विचारों की सड़ी लाश लेकर सत्ता के पेड़ पर बैठ कर समाजवादी इतिहास की बात करता है. मेरी प्यारी रंग बिरंगी गिलहरी बहनों, तुम सब खूब रंग बदलती हो लेकिन कोई है जो इस मामले में तुमसे भी कहीं आगे है. मै अपने बारे में इतना ही जानता हूँ कि,

“मै तो अखलाक के हांथों बिका करता हूँ, और होंगे तेरे बाजार में बिकने वाले”

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