कल के टाइम्स आफ इंडिया के प्रथम पृष्ठ के सर्व भारतीय संस्करणों में आदरणीया जया बच्चन जी की मेरे साथ एक भावुक अन्तरंग तस्वीर के नीचे शीर्षक था “पार्टी पहले” और खबरों में वर्णन था कि मुझ पर समाजवादी मित्र “भावनात्मक अत्याचार” कर रहे है. मैने बच्चन परिवार में सभी को अपना मनतन्य बताया था कि यदि जया जी “पार्टी पहले” के सिद्धांत के अनुरूप लड़ना ही चाहती है तो पूरे परिवार को और कम से कम मेरे अग्रज अमिताभ जी को इन्ही का साथ देना चाहिए. दिल्ली में पत्रकारों से अनौपचारिक वार्ता के दौरान मैने जया जी को बधाई भी देदी थी और अपनी पुरानी पार्टी से अनुरोध किया था कि जया जी को पार्टी का प्रथम उम्मीदवार बनाए एवं बागी विधायक जो समाजवादी पार्टी से अलग हो कर मुझसे जुड़े हो उनके मत जया जी के खाते में आवंटित ना करें. परिवार राजनीति से दूर दूर तक निकट ना जाए यह मेरे बड़े भाई अमिताभ जी का निजी निर्णय है. आज सुबह भी मैने उनसे प्रार्थना की यदि जया जी लड़ना चाहती हो तो उन्हें लड़ने दे.

अब आइये जया जी के स्थान पर मोहन को दिए गए टिकट पर मै आता हूँ, अब मोहन अस्वस्थ है कम से कम अब सरकारी खर्चे पर उसका अच्छा इलाज हो जाएगा. मोहन ने कहा था कि जया बच्चन चुनावी नुमाइश का सामान है. मोहन ने यह भी कहा था कि अमिताभ बच्चन नरेन्द्र मोदी के चप्पू है और अपनी पत्नी के लिए राज्यसभा सदस्यता का भिक्षाटन नरेन्द्र मोदी से करने गुजरात गए है. इसी मोहन ने यह भी कहा था कि जया बच्चन को निकालने की जरूरत नहीं है क्यूंकि शीघ्र ही उनका कार्यकाल समाप्त हो रहा है. मुझ पर यह आरोप लगा कर मेरा निष्काशन किया गया कि मैने सिनेमा वाले नचैयों को लाने का काम किया है. संजय दत्त लखनऊ लड़ नहीं पाए. पहली बार जया प्रदा जी को आजम खान साहब रामपुर ले गए. हां, जया बच्चन जी को मै लाया था और मेरी वजह से ही मेरे अनुरोध पर राजनीति-विरोधी मेरे अग्रज अमिताभ जी ने उन्हें राज्यसभा में आने दिया था. अब समाजवादी पार्टी के डान श्री मुलायम सिंह जी से मेरा सवाल है कि जिन्हें लाने के लिए मुझे पार्टी निकाला हुआ, उन्हें आप क्यूँ लाए? जिस मोहन ने बड़े अप-शब्द कहे उन्हें टिकट दे कर आप कौन सा न्याय कर रहे है? जनेश्वर जी के ख़ास और अब तक सदन के नेता बृजभूषण तिवारी भले ही मेरे विरोधी हो, ओछी भाषा का प्रयोग तो नहीं करते. कही आप जया बच्चन जी के इन्कार से व्यथित हो कर बच्चन परिवार को खूब गरियाने वाले, मुझको गरियाने वाले मोहन को पुरष्कृत तो नहीं कर रहे है? बेचारा ब्रजभूषण! दुल्हन एक रात की! चाँद महीने का सदन का नेता बन कर रह गया. भाभी जया बच्चन चाहे ना लड़ी हो आपने पुनः इनका नामांकन कर इतना सन्देश तो दे ही दिया कि १८ वर्षों में १४ वर्ष जो मुलायम/अमर की जोड़ी के थे, उनके निर्देश में हुए काम-काज सही थे. फिल्म वालो को लाने के आरोप में निकाला गया बेचारा मै अब रामगोपाली और मोहनी गालियों से मोक्ष प्राप्त कर चुका हूँ, तो श्रीमान डान महोदय कृपया मुझे यह बताए जब आपको हमारी ही तरह सिनेमा वाले ही पसंद है तो – दर दर की ठोकरों इतना मुझे बता दो मेरा कुसूर क्या है?

डान साहब इस ब्लॉग को मेरी पार्टी वापसी की अर्जी ना समझे. आपको आपके रामगोपाल, मोहन और ब्रजभूषण का सबल सुपुष्ट नेतृत्व मुबारक.

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