आज मै श्रीकृष्ण की नगरी मथुरा में था. क्षत्रिय महासभा की रैली रेले में बदल गई. लगभग एक लाख लोगों में अधिकाँश क्षत्रिय भाई थे लेकिन उनके साथ-साथ महाराज अग्रसेन के वंशज वैश्य भाई, निषाद भाई, कुशवाहा, चौहान, और कुर्मी भाइयों के साथ साथ धर्मान्तरण के कारण मुसलमान बने क्षत्रिय भाइयों के समूह ने इस रैली को जातीय रैली की सीमा से काफी ऊपर उठा कर समाज के सभी वर्गों के समन्वय का संगम बना डाला.

कुछ लोगो के अनुसार मैं जनाधार विहीन, गगनबिहारी और हवाहवाई नेता हूँ और मुझ जैसे छुद्र व्यक्ति के लिए ऐसा विहंगम समागम. वाराणसी, गोरखपुर, जौनपुर, हरदोई, शाहजहांपुर, सहारनपुर, एटा, आगरा, और अंत में भगवान कृष्ण की लीलास्थली मथुरा में आ कर ऐसी अनुभूति हुई जैसे कि माता जगदम्बा ने मेरे राजनैतिक और सामाजिक प्रतिद्वंदियों को मेरे जनाधार का अहसास कराया है. स्वयं को मेरे पुराने नेता मुलायम सिंह जी से नजदीक दिखाने वाले कुछ क्षत्रिय नेताओं के एक वर्ग ने सौ बसों का जखीरा भेजते हुए आश्वस्त किया कि हम आपके विरोधी खेमे के टाइम बम है, समय से फूटेंगे. ईश्वर इनका भला करे और मुलायम सिंह जी को इनसे सुरक्षित रखे. यह स्वयं मुझसे कह रहे थे कि हम नील गाय है जहाँ लम्बी घास दिखेगी वहीं जाएँगे. लम्बी घास अभी तो आदरणीय मुलायम सिंह जी ही है, अतएव औपचारिक रूप से मुलायम सिंह जी के साथ और गुपचुप अनौपचारिक रूप से मेरे साथ. इन मौक़ापरस्त साथियों का तर्क था कि भाईसाहब श्री कृष्ण अर्जुन के साथ और उनकी सेना कौरवों के साथ, तो हम रिस्क क्यूँ ले, दिन के उजाले में मुलायम सिंह जी के साथ और रात के अँधेरे में आपके साथ. वाह रे राजनीति और इसके अभूतपूर्व खेल , कभी तुम भूतपूर्व और कभी हम भूतपूर्व. अमर सिंह का भूत जो समाजवादी यदुकुल के एक सज्जन के दुर्वचनों की भेट चढ़ गया जो अब प्रदेश के हर क्षेत्र और कोने कोने में खूब घूम रहा है. हमारे प्रवक्ता क्षत्रिय भाई हमें बहुत याद करते रहते है, शीघ्र ही उन्हें सादर प्रणाम करने देवरिया भी पहुंचूंगा.

महा-निषेध, दहेज़ उन्मूलन एवं गरीबी के आधार पर क्षत्रिय समाज का आर्थिक आधार पर आरक्षण के मुद्दे आज मथुरा की रैली में छाए. आदरणीय मुलायम सिंह जी, स्थापित क्षत्रिय नेतृत्व जो मेरी मदद से सांसद, विधायक, मंत्री, ठेकेदार और लाभार्थी बने, गायब है या फिर गुपचुप तौर पर मेरे साथ है. ईश्वरचंद्र विद्यासागर जो कि बंगाल के बहुत बड़े दार्शनिक थे, ने कहा था कि तुम्हारा विरोध वही करेगा जो तुमसे लाभार्थी हुआ हो. चाहे मेरे पुराने नेता मुलायम सिंह जी हो, मेरी पुरानी पार्टी सपा हो और फिर चाहे पुराने स्थापित क्षत्रिय छत्रप हो, सभी माननीय विद्यासागर जी की टिप्पणी के अनुकूल ठन्डे है या फिर धुर विरोध कर रहे है. सामान्य जन जिन्हें मुझसे कुछ मिला ही नहीं, कोई लेना-देना नहीं हमारे अति-पिछड़े, मुसलमान और गरीब क्षत्रिय भाई खुल कर साथ है.

क्षत्रिय जाती नहीं क्षात्र धर्म है और यह क्षात्र धर्म गरीब-गुरबों और अति-पिछड़ों को संरक्षण देने का धर्म है. हमारे पुरखे क्षत्री कुलभूषण मर्यादा पुरुषोत्तम श्री राम ने तो अति-पिछड़ी शबरी का जूठन तक चखा था. महाराणा प्रताप के संघर्ष में उनका सेनापति मुसलमान, आर्थिक मददगार अति-पिछड़े मीणा-भील समुदाय के भामाशाह और सेना में रूठ कर वापस आए भाई शक्ति सिंह ने दिया था. गंभीर बीमारी के बाद संवेदना की जगह जब मेरे दल ने मुझे अपमान और क्रूरता दी तो आम मुसलमान भाई जैसे डाक्टर अयूब और मुझसे रूठ कर दूर हुए अन्य दलों के बिछड़े क्षत्रिय बन्धु शक्ति सिंह की तरह लौट कर मेरे संघर्ष के साथी बने एवं अति पिछड़े समुदाय के भामाशाह की तरह ओमप्रकाश राजभर, हेमंत कुशवाहा, रामचरित्र निषाद, मनोज चौहान और महान दल के केशव मौर्य साथी भी मेरे साथ हो गए. अपने पुराने नेता के लिए बस यही कहना है कि-

“रहते थे कभी जिनके दिल में हम जान से भी प्यारों की तरह, बैठे है उन्ही के कूंचे में हम आज गुनहगारों की तरह”

आजमगढ़ की २५ फरवरी की रैली निर्णायक होगी. श्री अमिताभ बच्चन का कार्यक्रम निरश्त कर दिया हूँ ताकि समाजवादी साथी यह न कहें कि बच्चन जी की भीड़ की बैसाखी पर मेरी सियासत टिकी है. मुलायम सिंह जी, उत्तर प्रदेश के इन दौरों में मेरे साथ कोई नायक और नायिका नहीं अपितु आपके अपमान और राजनैतिक अभिशाप का आशिरवाद मुझे खूब फला-फुला रहा है, बहुत-बहुत धन्यवाद.

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