कल २७ जनुअरी को मेरा ५४वां जन्म दिन था. मेरा यह जन्म दिन और जन्मदिनों से बिल्कुल अलग था. आम क्रोधित कार्यकर्ताओं की भारी भीड़ और स्वर्गीय जनेश्वर जी के म्रत्युशोक के कारण जन्मदिन न मनाने की औपचारिक घोषणा के बावजूद मीडिया और समाज के विभिन्न क्षेत्रों के लोगों के हुजूम ने मेरे मन को उदास नहीं होने दिया. मुलायम सिंह जी ने बधाई दी, अच्छा लगा. दूसरा तोहफा पार्टी के प्रवक्ता की मांग का इस रूप में आना कि पार्टी छोडो. अरे भाई, यह सत्य है कि समाजवादी पार्टी का इतिहास हूँ, मै अब आपकी पार्टी का वर्तमान और भविष्य भी नहीं बनाना चाहता. बेशर्म मै हूँ या आप जो भूल गए कि लोकसभा चुनावो तक हर प्रचार की तस्वीर में मै श्री मुलायम सिंह जी का बगलगीर रहा. राज्यसभा सदस्यता मेरी कमाई है आपकी भीख में दी हुयी सौगात नहीं. बल्लो बाई का राज है क्या? फिर भी ज्यादा खुजली है तो बदायूं या कन्नौज खाली करवा दें, राज्य सभा छोड़ दूंगा. जिससे मन हो मुझे लडवा दे, रामपुर की तरह यह सीट भी जीत कर दिखा दूंगा.

मेरी चुप शालीनता को मेरी कमजोरी न माने. छेड़ोगे तो छोडूंगा नहीं. “सितम करोगे सितम करेंगे, करम करोगे करम करेंगे, जो तुम करोगे वो हम करेंगे”. अभी-अभी रघु ठाकुर जी से लम्बी वार्ता हुई. हमारे राष्ट्रीय प्रवक्ता की तरह श्री रघुठाकुर जी मिलावटी और दलबदलू नहीं बल्कि खांटी समाजवादी है. उन्होंने मुझे मिलावटी, निरंकुश, परिवारवादी और जातिवादी समाजवाद की पोल खोलने का पूर्ण आश्वासन देते हुए एक गंभीर बात बतायी. उन्होंने कहा कि नवनिर्वाचित राष्ट्रीय उपाध्यक्ष श्री ब्रजभूषण ने उनसे यह कहा था कि मेरी बीमारी में श्री मुलायम सिंह मुझे देखने नहीं अपितु अपनी अवैध अकूत अर्जित संपत्ति का हिसाब किताब करने सिंगापुर पहुंचे और वहीं मेरा और उनका विवाद हो गया.यह एक निष्चल, सीधे, ग्रामीण परिवेश के जमीनी नेता का चरित्र हनन है, इसका लेखा-जोखा पार्टी को ब्रजभूषण जी से करना चाहिए. मेरा मन और ईमान दोनों सच्चे है और मुलायम सिंह जी से मेरा कोई देना पावना नहीं है. सामने सिसियाते, मिमियाते है और पीछे जहर उगलते है. “क्या मिलिए ऐसे लोगो से जिनकी फितरत छुपी रहे, नकली चेहरा सामने आये असली चेहरा छुपा रहे”.

आज के लिए इतना काफी है. हद में रह कर राजनीति तहजीब तमीज के सलीके से बात हो तो बेहतर है. वरना मै बोलूँगा तो आप सब कहेंगे कि भाई बहुत बोलता है. पिछले दो दिनों में अपने करीबी मित्रो और परिवार के साथ बिताए क्षणों ने इन कटु प्रहारों पर मलहम का काम किया है.

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