मेरे और मुलायम सिंह जी के रिश्ते लगभग २० वर्ष पुराने है और पिछले १५ वर्षों से राजनैतिक धूप-छावं को हमने साथ-साथ भोगा है. मैने उनमे और स्वयं में कभी कोई भेद-भाव नहीं समझा. उनकी विपत्ति को अपनी और उनके लोगों को अपना जाना और माना. मेरे चरित्र को कलंकित करने के लिए सी.डी. की बातें हो रही है. स्वयं मेरे फोन की अवैध टैपिंग हुई, मामला उच्च न्यायालय में गया और उसके निर्देश से “प्राइवेसी ला” बना. मैने कभी उनके या उनके परिवार की किसी सी.डी. की बात नहीं कही बल्कि मात्र इतना माना कि एक सी.डी. जरूर है जो आय से अधिक संपत्ति के मामलों के मुकदमे के शिकायतकर्ता की है, जिससे मुलायम सिंह जी की ईमानदारी सामने आती है. “कैश फार वोट” में भी मेरी चर्चा के मूल में मेरी पार्टी के वरिष्ठ नेता भाई रेवतीरमण सिंह जी का वीडियो फुटेज है, मेरा नहीं. मै रेवतीरमण जी पर कोई आरोप नहीं लगा रहा हूँ क्योंकि संसदीय समिति उन्हें भी क्लीन चिट दे दी है. पार्टी ने मेरे यूं.पी.ए. प्रेम की बात कह कर यह आरोप लगाया कि यूं.पी.ए.-२ सरकार को दिया गया मेरा समर्थन मेरे अकेले का निर्णय है, पार्टी का नहीं. सच तो यह है कि मैनपुरी से मुलायम सिंह जी का कांग्रेस के विरुद्ध विपक्ष में बैठने का समाचार मिलने पर प्रधानमंत्री श्री मनमोहन सिंह जी की जब मुझसे वार्ता हुई तो मेरे अनुरोध पर श्री मुलायम सिंह जी ने कृपापूर्वक मुझे अधिकृत करते हुए माननीया राष्ट्रपति महोदया से मिल कर यूं.पी.ए.-२ की सरकार को समर्थन देने का निर्णय पहुचाने का आदेश दिया. संभवतः पार्टी प्रवक्ता एवं अध्यक्ष के मध्य कोई संवादहीनता है. पार्टी प्रवक्ता का यह भी बयान है कि मैने कोई डील अपने लाभ हेतु यूं.पी.ए.-२ की सरकार से की है. ऐसा करने पर संभवतः सिंगापुर जाने के पूर्व तीन बार समय माँगने के बावजूद कांग्रेस अध्यक्ष से समय ना मिल पाए, यह तो संभव नहीं. हाँ, प्रधानमंत्री से ले कर विधि मंत्री तक आदरणीय मुलायम सिंह जी की झूठे मामलों से मुक्ति दिलाने की गुहार मैने सदैव की है और प्रबल राजनैतिक दूरियों के बावजूद मेरी यह मांग लगातार जारी रहेगी. अध्यक्ष जी के विधिक मामलों पर कितनी बार भाई रामगोपाल जी ने संसद के अन्दर या बाहर आवाज उठाई है. हाँ, स्वर्गीय जनेश्वर जी मरते दम तक इस विषय पर चिंतित रहे.

मुझे आश्चर्य है कि प्रवक्ता महोदय शर्मलशेख वार्ता के बाद श्री मुलायम सिंह जी का भारत-पाक सम्बन्धो पर दिया गया संसदीय बयान नहीं देख पाए, बेचारे हार जो गए वो भी तीसरे नंबर पर रहके. भारत-पाक सम्बन्धो पर मेरा बयान श्री मुलायम सिंह जी के उसी बयान का प्रतिविम्ब था. मै कल तक का १४ वर्ष पुराना बेचारा प्रवक्ता था और आप आज के बेचारे प्रवक्ता है. हमारी गूंगी जबानो से हमारी अपनी कहाँ हमारे नेता की ही वाणी मुखरित होती है. कन्नौज/बदायूं चाहिए ही नहीं, रखे रखिये आदरणीय मुलायम सिंह जी के नाम पर प्रवक्ता जी आपने मुझे रामगोपाल जी के द्वारा “पागल” उदघोषित करने के बाद “बेशरम” की पदवी दे दी. आप मेरे क्षत्रिय भाई है, मेरी शुभकामना है कि आप मुझे भला-बुरा कह कर जल्द से जल्द राज्य सभा पहुँच जाएं. जागरण में आया कि मैने सोनिया जी और मायावती जी की तारीफ़ की, जो कि बिल्कुल गलत है. मैने तो मात्र इतना ही कहा था कि समर्थन ना देने पर मायावती जी पर गेस्ट हाउस काण्ड और बीमारी की छुट्टी माँगने पर अमर सिंह का भी मायावती की तर्ज पर राजनैतिक शीलहरण; भाई रहम करो. मैने गाजीपुर की सभा में प्रवक्ता जी का नाम ना लेने का संकल्प किया था, द्रढता से उस पर कायम हूँ.

अब बता दूँ कि श्री मुलायम सिंह जी की राजनीति से दूर समाजवादी दल के लाखों – करोड़ो सामान्य कार्यकर्ता की हैसियत से एक निर्वाण प्राप्त कार्यकर्ता “लोकमंच” नाम के एक गैर राजनैतिक संगठन के माध्यम से सक्रिय रहेगा. फिलहाल मुंबई में बड़े भैया अमिताभ जी के घर पर हूँ. आयुष्मान अभिषेक, भाभी जया जी और बहूरानी ऐश्वर्या भी साथ है. बड़के भैया २६ फ़रवरी को मेरे गृह जनपद आजमगढ़ के पकड़ी गाँव में “कंप्यूटर कम अंगरेजी” सेंटर का उदघाटन करने आएँगे. यह कार्यक्रम “निष्ठां” नाम की संस्था की तरफ से होगा जिसकी अध्यक्ष सांसद जया प्रदा जी है. आखिर पिछड़े उत्तर प्रदेश के गाँव के बच्चों और अभिभावकों में यह सन्देश तो जाये कि “पढो लिखो और बड़े बनो”. मेरे और मुलायम सिंह जी के सम्बन्धो का विशलेषण टुच्चे लोग करना बंद करे तो बड़ी कृपा होगी.

“वक्त का आखिरी फरमान अभी बांकी है, मेरी तकदीर का अंजाम अभी बांकी है,
किस तरह मिटाएंगे मिटने वाले, एक अपना आवामी निगेहबान अभी बांकी है.”

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