आजकल हर मौके-बेमौके विपक्ष पक्ष को शर्मिन्दा करने में लगा हुआ है. आदर्श हाऊसिंग स्कैम में कांग्रेस ने अपने मुख्यमंत्री श्री अशोक चौहान की बलि दे दी. कामन वेल्थ गेम में अहंकारी सुरेश कलमांडी की शहादत हुई. ए.राजा प्रकरण में उनकी गिरफ्तारी हुई. ए. राजा को मंत्री बनाने में टाटा-राडिया टेप के अनुसार बरखा दत्त, वीर सांघवी, कानीमोजी की भूमिका पर तो टिप्पणी की जा सकती है लेकिन ए.राजा की मंत्रिमंडल नियुक्ति प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के अधिकार क्षेत्र के बाहर की बात थी. भाजपा का स्वयं का अनुभव होगा कि श्री टी.आर. बालू क्या माननीय अटल जी की कैबिनेट में अटल जी के कृपापात्र थे अथवा करूणानिधि जी की करुणा के प्रत्याशी. दुःख तो इस बात का है कि चाहे वह द्रमुक दल हों या सुश्री ममता बनर्जी का तृणमूल, इन क्षेत्रीय दलों के क्षत्रपों के क्रिया कलाप और तेवर का खट्टा-मीठा स्वाद भाजपा के अटल जी से लेकर कांग्रेस के मनमोहन सिंह जी तक गठबंधन की राजनीति के तहत मजबूरन चख रहें है.
इन सियासी हालातों को देख के लगता है कि अमेरिका की तरह भारतीय राजनीति का भी दोदलीय ध्रुवीकरण हो जाए. कांग्रेस के वरिष्ठ नेता श्री वसंत साठे ने एक बार इस बहस की शुरुआत की थी और हरियाणा के चुनाव प्रचार में आदरणीय लाल कृष्ण अडवानी जी ने भी मतदाताओं को अपील करते हुए कहा था या तो मेरे दल भाजपा को या फिर मेरे धुर विरोधी दल कांग्रेस को अपना मत दे देना पर अपना मत क्षेत्रीय दलों के क्षेत्रवाद के दलदल में ना धंसा देना. मिश्रित हुकूमतों की अजीबोगरीब कवायदों ने कभी अटल जी को एक मत से पराजित किया और कभी देश में सर्वमान्य ईमानदार छवि के प्रधानमंत्री को अपनी साख का हवाला संसद के पटल पर देने को लाचार किया.
जापान में सुनामी क्या हुआ, न्यूक्लियर डील की प्रासंगिगता एवं उपयोगिता पर भी प्रश्नवाचक चिन्ह चिन्हित करने वालों की कतारें लग गई. कभी कभी मुझे लगता है कि क्या कलाम साहब मुझे गलत सलाह दे गए, सरकार बचा कर डील कराकर क्या मैने कोई गुनाह कर डाला? उधर स्वर्गीय जनेश्वर मिश्र के घोषित राजनैतिक उत्तराधिकारी श्री बृजभूषण तिवारी ने मुझ पर आरोप मढा कि मैं इस डील को कराने के लिए कांग्रेस कोष से सैकड़ों करोड़ की राशि उदरस्थ कर चुका हूँ और पार्टी का शेयर आजतक पार्टी को नहीं मिला.
मैने यह डील मुख्य रूप से देश के हित में कराई थी क्योंकि चीन और पाकिस्तान एकजुटता से इन्टरनेशनल एटामिक इनर्जी एसोसिएशन में भारत का प्रबल विरोध करने में जुटे थे. सौभाग्य से मुझे इंडिया टुडे कान्क्लेव में अभी हाल में हुस्नी मुबारक की तानाशाही को अपने नेतृत्व से खत्म करके आंदोलन के बाद पहली बार भारत आए नोबल पीस प्राइज विजेता एवं इंटरनेशनल एटामिक इनर्जी एसोसिएशन के कर्ताधर्ता डाक्टर मोहम्मद अल बरदाई मिल गए. मै उनसे पूछ बैठा कि सर, कलाम साहब तो न्यूक्लियर डील के पक्ष में है, आप भी डा. कलाम की तरह मुसलमान और इस विषय के ज्ञाता और अभी हाल में हुए दुनिया के सबसे बड़े जन आंदोलन के नायक और आने वाले दिनों में इजिप्ट के सियासी मुस्तकबिल के हीरो है. आप ही बताएं कि न्यूक्लियर डील कराके मैने कौन सी गलती कर दी, विपक्ष जबसे यह डील हुई मेरी नींद हराम किये है. डाक्टर मोहम्मद अल बरदाई ने कहा कि अमर सिंह जी आप चैन की नींद सोएं, आपने राष्ट्रहित का काम किया है, ताकि बिजली मिले और विकास हो. नाइजीरिया के पास तेल का बड़ा भण्डार है पर नाइजीरिया में बिजली न होने के कारण तेल के बड़े भण्डार का खजाना भी उसे विकास की राह में नहीं डाल पाया है. रही न्यूक्लियर डील बिजली की सुरक्षा की बात तो ईश्वर एवं प्रकति के प्रलय से कौन सी तकनीक सुरक्षित है. हाइड्रो पावर के लिए बना बाँध टूट कर कई बड़ी आबादी को प्रकति के प्रकोप पर जलमग्न कर सकता है. आज वापस मै अपने देश कैरो जाते हुए हवाई दुर्घटना का शिकार हो सकता हूँ. इस तरह की निषेधात्मक सोच न्यूक्लियर पावर के लिए हास्यास्पद है. चीन के पास हर तकनीक हो और आपका भारत रहे तकनीक विहीन, मै इस बात का कायल नहीं. आप दुरस्त है, मानसिक द्वन्द ना रखे, घर जाकर आराम की नींद बिना तनाव के लें. डा. कलाम के बाद इजिप्ट की आजादी के गांधी, नोबल पुरस्कार विजेता एवं न्यूक्लियर पावर के सुविख्यात अन्तर्राष्ट्रीय विद्वान डा. मोहम्मद अल बरदाई की पुष्टि ने मुझे गौरव का अहसास दिलाया और मेरे मन ने कहा कि शर्मिन्दा मत हो, और सारी दुनिया से चीख के मै कह रहा हूँ, मै शर्मिन्दा नहीं हूँ.
अब आइये इस विवाद के दूसरे पहलुओं पर भी चर्चा कर लें. एक ‘जैन हवाला’ डायरी निकली जिसमें देश के लगभग सभी दलों के प्रमुख नेता जिनमे आदरणीय अडवाणी जी भी थे के नामों की उल्लेख उनके नामों के आगे उनको भुगतान की गई राशि के वर्णन के साथ था. उन दिनों, श्री नरसिम्हा राव प्रधानमंत्री थे और उनकी सी.बी.आई. ने किसी की इज्जत का ख़याल ना करते हुए सब पर मुकदमा जड़ा. बाद में बिना सबूत और आधार पर किसी डायरी या पन्ने की लिखावट को सबूत ना मानते हुए अडवानी जी समेत सबको सुप्रीम कोर्ट ने बाइज्जत बरी कर दिया. आज विक्कीलीक का लीक है कि आदरणीय अडवानी जी ने अमेरिकियों को बताया, हमारा विरोध तो विरोध के लिए प्रतीकात्मक है, हम भी अमेरिका के साथ-साथ है. अब भाजपा बताए इस खुलासे को हम क्या माने, सच या झूठ?
ईश्वर की बड़ी कृपा है कि विक्कीलीक और टाटा-राडिया टेप दोनों में मेरा जिक्र तक नहीं है. इस लीकेज में अटलजी के दामाद श्री रंजन भट्टाचार्या, हिलेरी क्लिंटन के फंड रेजर श्री संत चटवाल, अजित सिंह, कैप्टन सतीश शर्मा और अब तो आदरणीय अडवानी जी तक का नाम शामिल हो गया है. श्री अजीत सिंह निष्ठा से न्यूक्लियर डील के वक्त अडवानी जी के साथ ना सिर्फ अपने दल के सांसदों का मत दिये बल्कि एन.डी.ए. में शामिल हो कर भाजपा के तत्कालीन अध्यक्ष श्री राजनाथ सिंह जी को भी पश्चिम उत्तर प्रदेश से जिताया. हाल में भाई अजीत सिंह के नेतृत्व को थाम रहे डा. अयूब को श्री अजीत सिंह का पुराना भाजपा प्रेम मालूम ही होगा. हाय! ये कैसी आग है, लगी नहीं धुंआ है, पैसा देने का आरोप कांग्रेस पर, इनका कहना है कि दिया ही नहीं, अडवानी प्रेमी, डील विरोधी भाई अजीत सिंह का कहना है कि मिला ही नहीं. बाबा, लेन-देन हुआ नहीं तो इस विक्कीलीक के सहारे अपने प्रधानमंत्री को जलील करना छोडो.
फर्जी दस्तावेज और अफवाहें अगर भविष्य की जांचों का आधार है तो सबसे पहले राजदीप सरदेसाई की जांच करो जो बकौल भाजपा सारी बातों के तय होने के बाद भी trust vote वाले दिन अपने स्टिंग को ‘फुलप्रूफ’ ना बताते हुए, इसे दिखाए नहीं और संसद की “कैश फार वोट” समिति के सामने भी यही बयान दिया. स्टिंग के समय मौजूद होने के बावजूद श्री सुधीन्द्र कुलकर्णी और श्री अरुण जेटली की उपस्थिति में अपराधी का भेजा पैसा जो एक तरह से कातिल के क़त्ल का हथियार थी, उस पैसे को छूकर, छेड़-छाड़ कर, उछालने-कुदाने के लिए संसद में भिजवा दिया. पैसे से छेड़-छाड़ ना होने की स्थिति में पैसे पर पैसा भेजने वाले के उँगलियों के निशान और नोटों पर लगी बैंक की स्लिप इस पैसे का “मनी ट्रेल” बनाने में मददगार होते. क्या सरदेसाई साहब और उनके साथियों पर नोटों से छेड़-छाड़ करने और साक्ष्य को खत्म करने के अपराध का मुकदमा चले या इन्हें छोड़ दिया जाए? दाल में काला कुछ जरूर है. फिर सरदेसाई सर एक स्टिंग और है जो सुश्री उमा भारती ने जारी की थी, जहां फगन कुलस्ते एक बड़े भाजपाई नेता और एक भाजपाई मुख्यमंत्री का नाम ले रहे है. ‘स्टिंग ओवर स्टिंग’ और ‘स्पाई ओवर स्पाई’ क्या तमाशा हुआ है. चलिए आखरी बात क्या दल-बदल मात्र भाजपा से हुआ है, मेरे तबके दल समाजवादी पार्टी के सांसद श्री राजनारायण बुधौलिया और श्री एस. पी. सिंह बघेल ने अडवाणी जी को अपना मत क्यों दिया? वृहत्तर जांच हो जाए, सरदेसाई, उमा भारती टेप के सारे कलाकार और उभय पक्षों के सूचीबद्ध दलबदलुवों से गहन पूछताछ हो पर क्या इतने दिनों बाद इन तिलों से तेल निकलेगा या हम सब एक दूसरे को देख कर यही कहेंगे कि ‘हम सब चोर है’ आओं ‘चोर-चोर’ खेलें. रहमान साहब का ‘जय हो’ इस बात के लिए नहीं, फिर भी जैसा आप सब चाहे तो चलिए कहना शुरू कीजिये हम, तुम, सत्ता, सियासत, हमाम, हम पुंगे तुम नंगे. निकला क्या-
“बहुत शोर सुनते थे, पहलू में दिल था,
जो चीरा तो एक कतराए खू ना निकला.
तीखे विरोध औए कड़े राजनैतिक तेवरों के बाद भी विरोधियों से कैसे सहजता से निभाएं, यह आदरणीय अडवाणी जी का अदभुत गुण है. अभी हाल ही में श्रीमती सोनिया गाँधी जी को स्विस बैंक खाते के आरोप के सन्दर्भ में दी गई सफाई इसका ज्वलंत उदाहरण है. व्यक्तिगत शौहार्द और प्रबल राजनैतिक लड़ाई किसी भी व्यक्ति या पार्टी के साथ समनांतर तरीके से कैसे चलती रहे, और संबंधों की मधुर निर्वहता भी हो जाए, यह उनके चरित्र से सीखने की बात है. श्री मुलायम सिंह ने ‘कैश फार वोट’ की व्यापक जांच की मांग की है. सबसे पहले इनके विश्वसनीय वरिष्ठ साथी रेवतीरमण सिंह का चेहरा और भाजपा सांसदों से डील करते हुए उनका व्यक्तित्व सामने आएगा. जब विपक्ष की मांग पर बगैर अड़े सरकार ने जे.पी.सी. मान भी ली, जिसमे मनमोहन सिंह जी को पराजित करने वाले भाजपा के श्री विजय कुमार महरोत्रा के साथ मुलायम सिंह जी के विद्वान भाई प्रोफ़ेसर भाई रामगोपाल यादव भी थे, तो अब कौन सी चुहिया इस पहाड़ की खुदाई से निकलने वाली है. सपा का शपथ ना हो पाने का क्रोध समझ सकता हूँ पर तात्कालिक उतावलापन श्री मुलायम सिंह जी के सियासी कद को रोज बौना किये जा रहा है. आज बस इतना ही.

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