क्षमा चाहता हूँ, चाह कर भी कई दिनों से ब्लॉग न लिख पाया. डॉ. राममनोहर लोहिया अंग्रेज़ी के विरोध से ज्यादा भारतीय आंचलिक भाषाओं के प्रचार-प्रसार के पक्षधर रहे. मंदिर, मस्जिद, जाति, वर्ग, धर्म समाज को विभाजित करते है. सिनेमा के अँधेरे में हिन्दू, मुसलमान, ईसाई बिना एक दुसरे की जाति पूंछे कलाकारों के हास्य पर हँसते है और उनके पर्दे के दुःख पर दुखित हो कर रोते है. “मात्रभूमि” केरल का एक बड़ा अख़बार है, इन्होने रेडियो पर एक प्रतियोगिता रखी, “कौन मिलेगा अमर सिंह से”? अपने दल के मुलायम “मोम पुरुष” है जिन्हें कभी “लौह पुरुष” पुरुष कहा जाता था, काश यहाँ देख पाते कि जिस घायल साथी को आहत पीछे छोड़ कर आगे चल पड़े है, उससे आज भी मात्र मुलाक़ात की प्रतियोगिता युवाओं के लिए एक बड़ी मीडिया सुदूर दक्षिण के केरल में चला रही है. “होनी तो हो कर रहे, अनहोनी ना होय, जाको राखे सईंया मार सके न कोय”. हाँ तो मै केरल में “मुंबई मिट्टाई” फिल्म में अपनी अति-सुन्दरी मित्र डिम्पल का संगीतकार पति बना हूँ. डिम्पल का अप्रतिम सौन्दर्य स्वयं में कविता और संगीत का अद्भुत समन्वय है. इससे पूर्व इस मलयालम फिल्म के अलावा जयाप्रदा जी की फिल्म “शेष संघात” में मैने बंगाली भाषा में नक्सलवादी समर्थक की भूमिका की थी. अनेकता में एकता भारत के सहनशील सहिष्णु संस्कृति की विरासत है. एक उत्तर भारतीय मै अच्छी बंगाली और अब अच्छी नहीं तो ठीक-ठाक मलयाली बोल रहा हूँ. यह फिल्म मै अपने ईसाई मलयाली ड्राइवर के लिए कर रहा हूँ जिसने उत्तर भारतीय हिंदी भाषी अमर सिंह को स्वयं अपनी इच्छा से युवावस्था में अपना गुर्दा देकर नया जीवनदान देकर बचाया और यह सन्देश दिया कि धर्म और आंचलिकता मानवनिर्मित संकीर्णताएं और क्षुद्रताए है. सृष्टि का रचयिता एक वसुंधरा और एक मानव योनी का निर्माता है. मेरे गरीब ड्राइवर का मलयाली ईसाई गुर्दा हिन्दू अमर सिंह के शरीर में ठीक-ठाक चल रहा है. इस ईश्वरीय सन्देश के संवाहन ने मुझे यह फिल्म करने के लिए प्रेरित किया. मै डिम्पल का चिर ऋणी रहूँगा कि पर्दे पर ही सही, मेरी पत्नी तो बनी, बहुतो को तो अब भी बहुत रश्क होगा. किसी नेता को जीवन के चौदह साल, किसी परिवार को पत्नी, बच्चों से अधिक समर्पण दो दशको तक निस्वार्थ देने के बाद मिला धोखा मन को खाली और वियोगी बनाता है तो मुझे मेरे गरीब ड्राइवर का गुर्दा देना मेरी आदमियत को मरने से बचाता है. धोखा अब मेरे जीवन का पर्याय बन गया है. मै गंभीरता से सोच रहा हूँ कि उत्तर प्रदेश के २०१२ चुनावों से पूर्व भाई मनोज तिवारी, जया प्रदा जी और मै एक भोजपुरी फिल्म “धोखा” बना कर रिलीज़ करें एवं उसके केन्द्रीय चरित्र श्री चालू प्रसाद पर कथानक का काम शीघ्र शुरू हो जाए. जया बच्चन जी से तो अब कुछ कहना ही नहीं है, वरना उनसे भी एक भूमिका सत्ताधारी पक्ष की नेत्री की करा सकते थे.
शूटिंग की इस आपाधापी में एक दुखत समाचार भाई शारदानंदन अंचल की म्रत्यु का मिला. अंचल जी बलिया में नारद, अम्बिका, रामगोविंद से वरिष्ठ थे लेकिन राज्यमंत्री से ऊपर नहीं गए. बलिया के सांसद नीरज शेखर बराबर उन्हें श्री चंद्रशेखर का निजी विरोधी बता कर उनके ऊपर क्रुद्ध रहते थे. श्री हरिकेवल प्रसाद जी राजनैतिक प्रतिद्वंदी तो रहते थे लेकिन अपनी शालीनता उन्होंने कभी भी नहीं छोडी. अब नीरज को क्या कहूँ जब वह मेरे ही विरुद्ध सभाओं में बोल रहे है तो अंचल जी कौन है? मुझे नीरज के भाई पंकज की याद आ रही है, जिन्होंने मुझे इनके लिए आगाह किया था. अंचल जी के समर्थको को नीरज का उनके प्रति भाव पता है, पता नहीं अंचल जी की असामयिक मृत्यु एवं उनके साथ के समर्थकों के विरोध का क्या असर नीरज पर पड़ेगा, वैसे भी अम्बिका, रामगोविंद और नारद उनके चहेते तो नहीं है. २२ तारीख को मै नीरज शेखर की राजनीति के चाणक्य जसवंत के क्षेत्र में उन्हें आगामी विधान परिषद् चुनाव में सदस्य बनने की अग्रिम बधाई देने जा रहा हूँ. सपा से मेरे विद्रोह के बाद यह मेरे संपर्क में रहे और बलिया के लिए जसवंत और प्रतापगढ़ के लिए मोती सिंह ने पूछा भाई साहब क्या करना है? मेरा ईश्वर जानता है कि मैने कहा कि जहां है वही रहिए. अखिलेश यादव ने कहा है कि “अंकल हमें गाली दे रहे है”, बेटा यह अंकल का काम नहीं है तुम्हारे असली चाचा रामगोपाल के कुकर्मों का फल है जो तुम और तुम्हारे पिता भोगेंगे क्यूंकि मै तुम्हारी जफ़ाओं का वियोगी हूँ,
“वियोगी होगा पहला कवि, आह से उपजा होगा गान,
उमड़ कर आँखों से चुपचाप वही होगी कविता अनजान”
मेरी आह से डरते रहो, कहते रहो मै आगे चलता रहूँगा, पीछे मुड कर मै भी तुम्हारे पूज्य पिता की तरह नहीं देखता. २००९ में “लोरिक यादव विद्यालय” बलिया में मुख्य अतिथि के रूप में मुझे अंचल जी ले गए थे, हम दोनों ने परस्पर अपने नेता की “यूज़ एंड थ्रो” की नीति की हाल में ही विस्तृत चर्चा भी की थी. फिर जल्द मिलने का वादा था, तब तक आप चले गए. मै शूटिंग निपटाते ही संभवतः १५ को अंचल जी की तेरहवी पर पहुंचू. प्रतिशोध न लेना, प्रतिकृया में न रहना, अपने से उपेक्षा और सहनशीलता अब हमारी संस्कृति और विरासत नहीं रहे. विचारों के विरोध को भी अब लोग गाली मानते है. सहनशीलता की संस्कृति का अवसान हुआ तो हमें इस लोकशाही में स्थाई रूप से अघोषित आपातकाल में रहना होगा. यह आपातकाल जरूरी नहीं कि कांग्रेस प्रशासन का हो जो मात्र जेल तक सीमित हो, यह मुलायम जी के अतीत और मुख्तार के तत्काल भोग योग का आपातकाल भी हो सकता है जिसकी परिणिति राजू पाल और कृष्णानंद राय जैसे विधायक, राजनैतिक उपेक्षा के शिकार अमर सिंह और अंचल जी जैसे कार्यकर्ता भी हो सकते है. ख़ैर नेताओं के नाम पर अपने अपने क्षेत्रों में भयंकर रूप से पराजित नेताओं के प्रति नेताजी के प्रेम पर बस इतना ही कहना है,
“बुझा-बुझा कर मुंडेरों पे सजाता है, उसे चिरागों से नहीं रोशनी से नफ़रत है.”




आदरणीय अमर सिह जी ,
आपका लेख अच्छा लगा ! कम से कम एक लेख ऐसा लिखे जिसमे श्री मुलायम जी का वर्णन न हो ! निगेटिव राजनीति के बजाय पाजीटिव राजनीति करे ! ब्लाग से आप को पता चल ही रहा होगा कि कम से कम सारे राजपूत तो आप के साथ है ही ! भगवान आप को लम्बी उम्र दे !
आरेश
Dear Thakur sab
Door tak dekha ,dekha bedard jamane ko
Ab dil nahi karta kise se dil lagane ko
Bhool jayo mulayam singh ko or Sp ko aur navi party banao.Hum aap ke sath hai.JAI RAJPUTANA
Th.Rajeev singh Bhati (Sikandrabad bullandshahr)
Resp.Amar singh ji
राजपूतों की ऐसी कहानी है , कि राजपूत ही राजपूत कि निशानी है हम जब आये तो तुमको एहसास था , कि कोई एक शेर मेरे पास था हम गरम खून के उबाल हैं , प्यासी नदियों की चाल हैं , हमारी गर्जना विन्ध्य पर्वतों से टकराती है और हिमालय की चोटी तक जाती है हम थक कर बैठेने वाले रड बांकुर नहीं ठाकुर हैं …. गर्व है हमें जिस माँ के पूत हैं , जीतो क्यूंकि हम राजपूत हैं
RAJPUT: उठाकर तलवार , जब घोड़े पे सवार होते है !
बाँध के साफा , जब तैयार होते है !
देखती है दुनिया छत पर चडके
ओर कहती है काश हम भी राजपूत होते.!
ज़िन्दगी तो राजपूत जिया करते है, दिग्गजों को पछाड़ कर राज किया करते है, कौन रखता है किसी के सर पर ताज, राजपूत तो अपना राज तिलक सवयम किया करते हे ! amar singh ji yeh ummed hai hum ko aap se
Radhey Rana-
श्री अमर सिंह जी,
आप के विचार पढ़ कर अच्छा लगता है परन्तु एक सुझाव दूंगा. आप कृपया जया बच्चन जी के बारे में कुच्छ भी ना लिखें. यह अच्छा प्रतीत नहीं होता है. वोह एक महिला हैं, और आप के सबसे अच्छे भाई जैसे दोस्त की पत्नी हैं. संम्पर्क कोई इतने कच्चे तो नहीं होते कि आप कोई बात को लेकर सर्कास्टिक कमेन्ट पब्लिक ब्लॉग पर लिखें या लाखों लोगों के सामने माइक पर बोलें. यह बिलकुल सही नहीं.
पार्टी ना छोड़ने का जाया जी का निर्णय बिलकुल सही है. उनके राज्य सभा की मेम्बरशिप के कुछ ही महीने बचे है. उनको अपना tenure पूरा करने कि पूरी छूट होनी चाहिए. आप यह क्यों अपेक्षा रखते है कि लोग आप के बिना बोले आप के दिल की बात समझें और उस पर अमल करें. दूसरी बात, आप को पार्टी ने निकला है, आपने पार्टी छोड़ी नहीं है, इसलिए आप राज्य सभा के मेम्बर बने रह सकते हैं. मगर जाया जी पार्टी छोडती हैं तो वोह राज्य सभा की मेम्बर नहीं रहेंगी. आप की यह अपेक्षा नाजायज़ है कि वोह बिना tenure की परवाह करे आप के पीछे आयें. इन्तिज़ार तो कीजिये tenure ख़तम होने का. इंसान में कुछ सबर होना चाहिए. हम को रिश्तों की कदर करनी चाहिए. अपनों के विचारों की कदर करनी चाहिए. आप सोचिये आप के भाई जैसे दोस्त और उनकी पत्नी पे क्या गुजरी होगी आप के कमेन्ट सुन कर. बस इतना ही कहूँगा.
धन्यवाद
Deepak T
You have been spot on Deepak. Iam a follower of his blog and I too felt that these days he writes blog not on a particular subject but how he can bring mulayam singh under that subject. Otherwise everything is fine with his writing. Same is the case with Jaya Bachchan. He needs to understand her reasons and respect her decision. Media ke madhyam se unke parivarik naata ka jo vishleshan mujhe mila use amarsinghji aise hi chote kaaran se dhoomil naa karen to achcha hoga. I always wish they have a wonderful family bonding in the days to come.
Dear Sir,
Does Mulayam Singh deserve so much of tears and weeping as you are wasting on him? It shall only prove that you have not thrown him out of your mind even though he has shown you the door out of the party. Why should a negative force occupy your mind so much? It happens when politics is man-centred and not issues-ecntred or nation-centred.
Your active political life despite your impaired health proves that you are meant to do your work quickly before it is too late. Therefore you have to gravitate towards the nationalist forces and do a great deal to further the cause of the country and the downtrodden.
Regards
A.L.Rawal
khute pe bachdu kudta hai bhai Amar Singh ji…….ib thoken ki oomer likadgi, machine be jawab degi………
RAJPUT: उठाकर तलवार , जब घोड़े पे सवार होते है !
बाँध के साफा , जब तैयार होते है !
देखती है दुनिया छत पर चडके
ओर कहती है काश हम भी राजपूत होते.! !!!!
और नाटक चेतक एक्टिंग भी कर लेते है जो राजपूत कहलाते है !!!
Dear Amar Singh,
Life should go on despite the fact that you were used by Mulayam and his family.
Plese Dont waste your energy in critisizing him any more and all positive thoughts together for future use. It will do lot of good to you and you deserve to find out new friends.
Thanks if you hear my voice….
thakur sahab ki jai ho
राजपूत आप के साथ है
Sir
Chod KAl ki baate Lets begin
Think about futher Give your suggestion how to make UP no 1
I am very glad that you are engaging yourself with your hobbies, You enjoy your life with your hobbies, family and friends. No hatred should be left in your mind and actions. Forget the past and look forward to your future. I wish you all the best in your new life after Kidney transplant.
Respected Sir,
You have present good feelings today, Specialy a life given u by a person . Please do every type of help for him.
You r a good spokes person , So take the benifit of this god gifted quality.
See ahead only ..forget the past.
With Regards
ANAND SINGH YADAV
9915750347
I am waiting for your movie great actress dimple.
With Regards
ANAND SINGH YADAV
9915750347
Dear Amarsingji,
I have read your blog. It is vary interesting. I am waiting for your movie. I hope that you will get the success in cinema as you got in politics. I want to say plz do not think about those persons who deceived you and not give respect to your thoughts. I am always with you. May God bless you!
लेख अच्छा लगा….लेकिन फोटोस लगाने की जरूरत समझ से परे लगी.
i am intrested join your team
dear amer singh ji
mughe aapka aserwad mile jai to mai appani four new company run kar sakta hu plz sir reply……….
dear you are great,
manoj sahrma
amar ji adab ,aap ka lekh bahut achacha hain.aap ko yaad hogan shard ji ne lalu & mulayam ko aage laye hain .ab ye logn disha vihin ho chuke hain.musalman ke sahare satta sukh bhog chuke hain. na to vichar hain navicha dhara samaj vad taira sahara .
ab kuch karne ka samya hai na ki bolane pahle kuch karake dikhao bad me sab piche ho lenge
Amar bhai aap to photo me bilkum amrish puri lag rahe ho.
Lage raho.
If I may suggest with due regards to you, please stop wasting your time and energy on Mr. Mulayam Singhji.Move ahead and say so far so good. Leave him for Miss Maywati, she will and is quite capable to teach him a lesson. You should channalinse your energies to built a better and prosperous Uttar Pradesh. This is the need of the hour.Let the young men and women rally behind the issues of development, growth and equality in UP. Don to bother even if you have to join hands with Mr. Rahul Gandhi. No one is untouchable in poltics and life. Life always kepp on moving ahead, come what may on it path.Nothing is bigger than the life. Go with it.Life and living the life is very important. No one knows this better than you. We are all with you. Support life and all it doing with a open mind and heart. Things wil start looking up.do not bother with people like Mr. Mulayam and people of his clan. The world is much more vast and endless.Follow you heart.
अमर सिंह जी नमस्ते
में प्रशांत सिंह तोमर मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल से हु आपके साथ जो कुछ भी हुआ वो नहीं होना था मुलयम सिंह सारे राजपूतो के साथ धोखा किया है हमारे नेता को इस तरह से धोखा देना गलत है हम राजपूतो के साथ इतिहास से अब तक धोखा ही हो रहा है पैर राजपूत कभी नहीं हारते किसी ने कहा है ठाकुर वही जो ठोकर खाए
dear amar singhji,
i’a graet fan of u.i’m aiting eagerly hen u launch a ne party
respected amar singh
aap purvancal ke vikas ke baare me kya soch rahe hai.jab aap ke pass power thi tab aapne khuc nahi kiya aur jab aap party chor diye to purvancal ka vikas kar rahe hai. fhir bhi ami umeed karta hu ki aap khuch kare kisi ko to puravancal ki yaad aayi anhi to election ke time hi yaad sabko aati hai
Raviraj singh
reoti ballia
(up)
Dear Sir
Nice post but you should be more concentrate on politcs.
Sir You are looking lik prem chopra. Are you going to r…
mai appka party loke munch ka member bana chytahu