दाम्पत्य जीवन के हम और तुम पति-पत्नी, लोकशाही के हम और तुम पक्ष-विपक्ष, तो वो कौन है? “वो” वह है, जिसके नाम पर हम सभी दुष्कर्म करते है. यह मैने भी किया है, संसद में तर्कपूर्ण भाषण देना, हारे मुलायम को जुगाड़ी विधायकों की ताकत से मुख्यमंत्री बना देना, नुक्लियर डील के लिए सरकार बचा देना या फिर किसी बेबुनियाद मुद्दे को मुद्दा बना कर पेशबंदी की सियासत करना, यही अगर राजनीति है, तो मैने खूब की है. पर गजब है, १४ साल की बच्ची का बलात्कार बसपा विधायक करते है, बच्ची पर सरकार के कैबिनेट सेक्रेटरी आरोप लगाते है, मोबाइल चोरी का और बच्ची बाल सुधार गृह की जगह जाती है जेल में. जब तक टीवी चैनलों पर शीलू निषाद “मैं फूलन बन जाउंगी” नहीं कहती और न्यायपालिका की फटकार नहीं पडती, सरकार मौन रहती है.

अलीगढ़ में महिला मुख्यमंत्री की गाड़ी के आगे बसपा विधायक के बलात्कार के बाद महिलाएं बसपा मंत्री पर पति के अपहरण का आरोप लगती है. जौनपुर की एक महिला प्रधानाचार्य बंधक में रखे बेटे के डर से प्रबंधक के दुष्कर्म से पीड़ित आत्मदाह करती है. राहुल गांधी के सुल्तानपुर में एक मुस्लिम महिला समरीन बलात्कार की रपट सपा विधायक अनूप सांडा के खिलाफ लिखाने की वजह से अपनी ही बच्ची के अपहरण के मामले में फंसा कर बन्द कर दी जाती है और फतेहपुर की दलित बच्ची बलात्कार का प्रतिरोध करने पर घातक रूप से जख्मी की जाती है. गाजियाबाद से भी खबर है कि एक युगल जोड़े को पकड़ कर पुरुष की उपस्थिति में महिला से चार लोगों ने दुष्कर्म किया.

बहनजी आपका नारा था- “चढ़ गुंडन की छाती पर, मोहर लगेगी हांथी पर”. अब आपके प्रशासन में गुन्डे मदमस्त है और हाल है कि, “ गुन्डे चढ़ गए हांथी पर, गोली लगेगी छाती पर”. मायावती जी आप स्वयं महिला है, महिलाओं की चीख बराय करम सुनिए. पूरे उत्तर प्रदेश की महिलायें चीख-चीख कर आपको पुकारते हुए कह रही है कि-

“औरत ने जनम दिया मर्दों को, मर्दों ने उसे बाजार दिया,
जब जी चाहा मसला कुचला, जब चाहा दुत्कार दिया.”

सावधान मुख्यमंत्री जी, २०१२ ज्यादा दूर नहीं है!

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