प्रिय गाजी जी,
मुम्बई पहुंचते  ही मैने आपका लिखा पत्र ब्लॉग में देखा, यकीन नहीं होता कि यह सच होगा. पता लगाने पर पुष्टि हुई कि कम से कम यह तो सच है कि रामगोपाल जी के दोनों बयानों (दिल्ली और सैफई वाले) के समय आदरणीय नेता जी दिल्ली और सैफई दोनों जगह मौजूद थे और पुराने समाजवादियों से दिल्ली में उनकी बैठक की भी पुष्टि हुई है. फिर भी संदेह के आधार पर क्या कहूँ? आज़म, नेता जी के दिल की पुरानी धड़कन है और हो सकता है शिवपाल शहीद हो जाए. सुकरात के दोस्तों ने जब उन्हें जहर दिया तो उनका इन्तकाल हो गया, वह खुशनसीब थे. इस षड्यंत्र का शिकार और इसका जहर मुझे मिला तो लेकिन यकीन रखे सुकरात की तरह मै मरूँगा नहीं. शकील बदायुनी साहब ने कहा है न,
“दुनिया में हम आए है तो जीना ही पड़ेगा, जीवन है अगर जहर तो पीना ही पड़ेगा”.

मुहम्मद मुस्लिम गाजी द्वारा १.१५ बजे मेरी ब्लाग में पोस्ट किया गया पत्र

प्रिय अमर सिंह जी,

मैं मुहम्मद मुस्लिम गाजी आपको अपने पुराने नेता आज़म खान साहब के बारे में कुछ अंदरूनी बातें तफसील से बताना चाहता हूँ. समाजवादी पार्टी के पुराने नेता श्री जनेश्वर मिश्र, श्री ब्रिजभूषण तिवारी, श्री रामजी लाल सुमन, श्री मोहन सिंह एवं सबसे ऊपर श्री राम गोपाल यादव ने देश और समाजवादी पार्टी में आपके बढ़ाते उरूज के खिलाफ बहुत दिनों से अंदरूनी बगवात की योजना बनाने का काम किया था. उनकी इसी योजना की पहली कड़ी श्री राज बब्बर थे. आपको शायद पता न हो कि आगरा में पहली बार रामगोपाल यादव की उपस्थिति में ही राज बब्बर ने बगावत का बिगुल बजाया. श्री राज बब्बर को आगे कर यह मंडली पीछे हो गयी. बाद में यही हश्र श्री बेनी प्रसाद वर्मा जी का और अंत में आज़म खान साहब का हुआ. श्री राज बब्बर के अलावा आज भी बाकी सभी किरदार जनेश्वर जी के यहाँ पहुंचे रहते है.

लोकसभा चुनावो में पिछड़ा महासंघ बनाने के चक्कर में श्री मुलायम सिंह यादव साहब ने कल्याण सिंह जी को सपा के करीब लिया और उनके साहबजादे श्री राजवीर सिंह जी को सपा का राष्ट्रीय महासचिव बना डाला. आगरा सम्मेलन में एक ही गुलदस्ते में मुलायम-कल्याण की गुलपोशी हुई और खुद श्री मुलायम सिंह जी ने कल्याण सिंह जिंदाबाद के नारे जम कर लगवाये. काबिले गौर बात यह है कि उस दौर में अमर सिंह साहब आप अपने गुर्दे बदलवाने के लिए सिंगापुर के एक अस्पताल में भर्ती थे.

इस मंडली से पिछले दिनों नेताजी की मुलाकात के बाद आज़म खान साहब को वापस लाने की तैयारी शुरू हुई. बहू डिम्पल को लड़ाने से खफा रामगोपाल जी के दोस्त श्री रामजी लाल सुमन भी इस साजिश में शरीक हुए. यहाँ पर शिवपाल जी की जगह आज़म खान साहब को बिठाने की साजिश हुई और आज़म खान साहब ने अमर सिंह और जयाप्रदा को समाजवादी पार्टी से बाहर करने की शर्त रखी. श्री रामगोपाल जी के कड़े तेवर इसी साजिश का एक हिस्सा है और इसी के तहत बेशक आज़म खां साहब ने पार्टी से कहा कि बेइज्ज़त करके इस कमज़र्फ अमर सिंह को भी निकालो. जिस दिन रामगोपाल जी ने दिल्ली में प्रेस में अमर सिंह जी, आपके बारे में ऊलजलूल कहा, वही आज़म भाई ने रामगोपाल जी की तारीफों के पुल बांधे और उन्हें एक बड़ा बुद्धजीवी बताया. अमर सिंह जी अब तो आप सिर्फ बलि का बकरा हैं और आपका जाना भी तय है परन्तु षडयंत बनाने वाले इन गुरुवों का हम क्या करे? दिल्ली और सैफई दोनों जगह  आप पर रामगोपाल जी के तीखे हमलों और बयानों के समय श्री मुलायम सिंह जी की दोनों जगह मौजूदगी क्या महज़ इत्तफाक थी?

उधर दल के तीन छुटभैये मुस्लिम नेताओं द्वारा कल्याण कार्ड खेलने के आपके तथाकथित निर्णय का विरोध दिखाते हुए रामगोपाल जी ने आपकी सियासी शहादत कि मुकम्मल तैयारी कर ली थी. भला हो कल्याण सिंह का जिन्होंने मुलायम-कल्याण दोस्ती और फिरोजाबाद में डिम्पल यादव की उम्मीदवारी का पूरा ठीकरा अमर सिंह साहब आप पर नहीं बल्कि खुद जनाब कल्याण सिंह साहब ने पूरी जिम्मेदारी हमारे नेता मुलायम सिंह जी पर डाली. अब कल्याण फैक्टर को कल्याण सफाई के बाद आपसे जोड़े रखना नामुमकिन है. खुद कल्याण सिंह जी ने सपा से दोस्ती और बहू डिम्पल की उम्मीदवारी का पूरा सेहरा नेताजी के सर पर बाँध ही नहीं दिया है बल्कि उस आगरा अधिवेशन में जहाँ मुलायम सिंह जी ने कल्याण सिंह जिंदाबाद के नारे खुद लगवाये थे, इस समारोह में शामिल होने के लिए श्री रामगोपाल के दावतनामे को भी प्रेस में खुले आम जारी कर आपके खिलाफ कल्याण ठीकरा फोड़ने की साजिश नाकाम कर दी और आपके दुश्मन नंगे, परेशान और बदहाल हो गए है.

९८% सपा के वह कार्यकर्ता जो आपके खिलाफ रामगोपाल जी द्वारा बताये गए उन्हें तो आपकी अनुपस्थिति में रामगोपाल जी के नेतृत्व में विधान परिषद् चुनावो में भारी सफलता मिलनी चाहिए थी. धर्मेन्द्र यादव जी का बदायूं, मुलायम सिंह जी का इटावा और मोहन सिंह का देवरिया ख़त्म हो गया. सैफई महोत्सव के पंडाल में बैठी जनता ने भी कार्यक्रम तो देखा पर वोट नहीं दिया. आप २% समाजवादियों के नेता है आपके अनुयाई जाने जाने वाले श्री अक्षय प्रताप जीत गए. राजा भैया तथा कांग्रेस के प्रमोद तिवारी एवं रत्ना सिंह खुलेआम सरकार एवं बसपा के साथ आपके साथी श्री अक्षय प्रताप के खिलाफ वैसे ही थे जैसे कि कांग्रेस के बेनी बाबू बाराबंकी में खुलेआम बसपा के साथ थे. सपा के बड़ो की सम्मानजनक हार भी नहीं हुई परन्तु  आपकी शिष्या रामपुर की जयाप्रदाजी के क्षेत्र में सपा भले ही हारी हो पर बसपा को बराबर कांटे की टक्कर दी.

इस सारी योजना की जानकारी यूपी भवन के कमरा नंबर २०९ से दिनांक १० जनवरी २०१० को शाम ६.५० बजे विधायक महबूब अली ने मुझे खुद दी. बराए करम आप अपनी इज्ज़त बचाए. बजाये इसके कि आज़म खां की शर्तों  पर आप और जाया प्रदा जी निकाले जाये, आप खुद इस्तीफ़ा दे कर अलग हो जाये. कहीं जाये, खुद करें लेकिन आपकी कुर्बानी का कोई सिला न देने वाले इन हृदयहीन, क्रूर और षड्यंतकारियों से इनकी किसी हरकत से पहले, खुद निकल ले. इस खेल में रामगोपाल जी इस बार आप, जयाप्रदा के साथ-साथ श्री शिवपाल यादव को भी निबटना चाहते है क्योंकि विरोध अब सिर्फ आपसे नहीं बल्कि यादव वंश में है; “मुलायम के बाद मै रामगोपाल ही हूँ सरदार”, और इस साजिश में जनेश्वर जी, ब्रजभूषण, मोहन सिंह जी, रामजीलाल सुमन जी, कही दूर से ही सही राजबब्बर जी एवं खुलेआम आज़म खां भी शामिल है. आज़म खां साहब आजकल सपा के अनौपचारिक प्रवक्ता की हैसियत से रामगोपाल को “थिंक टैंक” और रामगोपाल उन्हें “फाइटर टैंक” खुलेआम कह रहे है.  आपके पास तो हजारो विकल्प है, शिवपाल जी का क्या होगा, जिनकी कुर्सी पर आज़म खां और रामगोपाल दोनों नज़र गडाए है. अंत में यही कहूँगा कि,

“जिनके लिए मर-मर के जिए, पाया उनसे क्या ठाकुर साहब,

कुछ बदनामी कुछ रुसवाई आपको मिली सौगात के नाम”

सादर

आपका हितैषी

मुहम्मद मुस्लिम गाजी

अध्यक्ष-स्टुडेंटस  इस्लामिक फेडरेशन आफ इंडिया

फोन: 9871273469

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