आज मै सुबह कोलकोता पहुंचा. ज्योति बाबू कट्टर वामपंथी थे लेकिन उनके व्यक्तित्व की सहजता और सुगमता कुछ ऐसी थी कि विरोधी भी या तो उनका सम्मान करते थे या उनसे अनुराग रखते थे. विरोधी लोकशाही में दो धुरियों में एक धुरी की भांति होते है, ऐसा उनका मानना था. उनके जाने के साथ भारतीय राजनीति के एक युग का अंत हो गया. एक पत्रकार ने कोलकोता में मुझसे पूंछा, क्या ज्योति बाबू का कोई विकल्प है? मैने उनसे पूछा, क्या महान नायक उत्तम कुमार या महान पार्श्व गायक हेमंत कुमार का कोई विकल्प है? कुछ लोग कालजयी होते है और ज्योति बाबू भी एक कालजयी नेता थे.
हिंदी में ब्लॉग इसलिए लिख रहा हूँ ताकि मेरे नेता मुलायम सिंह खुद पढ़ ले. कम्पूटर में गढ़े और अंगरेजी में लिखे  मेरे एक ब्लाग के लेख को लोगो ने उनके परिवार के प्रति मेरे विरोधी सुर का लेख बताया. जबकि परिवार का उल्लेख मैने बहुत ही सकारात्मक तरीके से इस सन्दर्भ में किया था कि नेता जी अंगरेजी की अनिवार्यता के विरुद्ध,  हिंदी और भारतीय भाषाओँ के पक्छ्धर है. यदि वह अंगरेजी के विरोधी होते तो संभवतः परिवार के बच्चे विदेश पढ़ने न जाते. लोहिया जी का अंगरेजी के पक्ष में एक लेख है, खोज रहा हूँ, मिला तो जल्द ही ब्लॉग पर डालूँगा. आराम करना, लोगो से मिलना और ब्लॉग लिखना जारी रखूँगा.
रात के १ बजे है, कल वाराणसी क्षत्रिय चेतना रथ को हरी झंडी दिखाने जाना है. राहुल जी ने भोपाल में मेरे बारे में कहा है कि अमर सिंह २५ वर्ष के युवा नहीं है, ठीक ही तो है, मै तो ५४ वर्ष का प्रौढ़ हूँ. कुछ सामाजिक कार्यक्रम मेरे इस्तीफे के पहले के लगे हुए थे, उन्ही को निबटा रहा हूँ. ५४ वर्ष की अब तक की आयु में २० वर्ष मैने नेता जी और दल को दिया है, जीवन के इस मध्यांतर को परिवार को परिवार, मित्रों और शरीर की स्वस्थता को देने का अवसर अब मिला है, इसके लिए अपने नेता को विशेष आभार और धन्यवाद देता हूँ. लेकिन अंत में यह तो कहूँगा ही कि:
“जीवन के सफ़र में राही मिलते है बिछड़ जाने को, और यादे दे जाते है तनहाई में तडपाने को”.
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