रहने की खुशी कम, ना रहने का गम ज्यादा
Posted by Amar Singh in General
कल १२ अक्टूबर लोकशाही के एक बड़े पुरोद्धा श्री राममनोहर लोहिया जी की पुण्यतिथि है. लोहिया जी अविवाहित रहे, उनका कोई निजी परिवार नहीं था. गरीब की गुरबत, औरत की लाचारी और मजबूरी, सामाजिक और जातीय असमानता, गरीबी और अमीरी का अंतर, यह वे भाव थे जिसने उन्हें आजन्म उद्वेलित रखा. सत्य कटु और अप्रिय होता है, वह भी खरा सच. यह लोहिया जी ही थे जिन्होंने नीतियों के लिए अपनी ही समाजवादी सरकार को केरल में चुनौती दे डाली. …