सहनशीलता की संस्कृति
Posted by Amar Singh in General
क्षमा चाहता हूँ, चाह कर भी कई दिनों से ब्लॉग न लिख पाया. डॉ. राममनोहर लोहिया अंग्रेज़ी के विरोध से ज्यादा भारतीय आंचलिक भाषाओं के प्रचार-प्रसार के पक्षधर रहे. मंदिर, मस्जिद, जाति, वर्ग, धर्म समाज को विभाजित करते है. सिनेमा के अँधेरे में हिन्दू, मुसलमान, ईसाई बिना एक दुसरे की जाति पूंछे कलाकारों के हास्य पर हँसते है और उनके पर्दे के दुःख पर दुखित हो कर रोते है. “मात्रभूमि” केरल का एक बड़ा अख़बार है, इन्होने रेडियो पर …