May 26

आजा पिया मोहे अंग लगा ले, जनम सफल हो जाए

Posted by Amar Singh in General

स्वर्गीय गुरूदत्त की अमर कलाकृति “प्यासा” में गीता दत्त जी का गाया कई दशकों पूर्व का यह गीत आज की आधुनिक राजनीति के सन्दर्भ में कितना सार्थक लगता है. पिछले दिनों समाजवादी पार्टी के शीर्ष नेतृत्व की कांग्रेस के शीर्ष प्रबंधकों से हुई घुटनाटेक मुलाकातों का पर्दाफ़ाश जब देश के टी.वी. चैनलों और समाचारपत्रों ने किया तो बवाल मच गया. समाजवादी पार्टी के नेतृत्व ने इसे कल्पना मात्र बताया. वामपंथी दलों और भाजपा समेत सभी विपक्षी दलों के संयुक्त निर्णय …

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May 23

कटुता क्यों?

Posted by Amar Singh in General

राजीव जी के स्मृति स्थल पर सोनिया जी के साथ-साथ बहन सुषमा को देख कर अच्छा लगा. सुषमा जी मुझे बहुत स्नेह करती है चाहे मिलना कम ही क्यों ना हो, उनके पति पूर्व समाजवादी नेता श्री स्वराज कौशल तो बड़े भाई की तरह ध्यान रखते है. नेहरू जी के समय की राजनीति में पीलू मोदी, डॉ राममनोहर लोहिया, श्री मधु लिमए, श्री प्रकाशवीर शास्त्री और कांग्रेस के अन्दर श्री फिरोज गांधी अपनी बातो को द्रढता से रखते थे …

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May 21

राजीव जी का निर्वाण दिवस

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श्री राजीव जी को मै बहुत कम यानी ना के बराबर जनता था. उनके अभ्युदय काल में मै कलकत्ता में बड़ा बाजार जिला कांग्रेस कमेटी का सचिव हुआ करता था. मै श्री सुब्रत मुखर्जी, जो अभी हाल तक तृणमूल कांग्रेस में शामिल होने के पहले तक पश्चिम बंगाल कांग्रेस के कार्यवाहक अध्यक्ष थे, के काफी करीब था और सुब्रत दा आदरणीय प्रणव दा के बेहद करीबी थे. बंगाल कांग्रेस के दूसरे बड़े नेता श्री सोमेन मित्र जिन्हें हम सब छोटे …

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May 18

हिंसा, नक्सलवाद और विकास

Posted by Amar Singh in General

छत्तीसगढ़ के दांतेवाड़ा में फिर खून बहा. इसके पहले तो सुरक्षाकर्मी मारे गए थे, अबकी सामान्य नागरिको की बारी थी. खून किसी का बहे, खून तो खून है. हमारे समाज की समस्या है कि भूख, पेट और राशन पर कई बड़े-बड़े भाषण है परन्तु नेताओं के सांप्रदायिक और जातीय विभाजन के भाषणों पर हमारी प्रणाली में किसी तरह का कोई प्रतिबन्ध या राशन नहीं है. थोथे नारों और प्रतीकों के सहारे हमारे राजनेता अपना काम-काज चला रहे है परन्तु वास्तविकता …

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May 16

क्षत्रियों के पोप नहीं रहे

Posted by Amar Singh in General

श्री भैरो सिंह शेखावत जी को मैने बहुत ही नजदीकी से देखा, समझा, और जाना है. मेरी उनकी पहली मुलाक़ात श्री ललित मोदी के विवाह के दौरान उस समय हुई थी जब वह राजस्थान के मुख्यमंत्री थे और ललित मोदी उस समय भी भाजपा नेत्री वसुंधरा राजे के विशेष स्नेही थे. धीरे-धीरे यह छोटी मुलाक़ात घनिष्टता में बदलती गई. अटल जी उनके काफी नजदीक थे और इस नाते उनकी दत्तक पुत्री और जमाता रंजन भट्टाचार्य जो मेरे भी मित्र है, …

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May 13

कुत्ता कौन?

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कल से नितिन गडकरी जी के इस बयान की बड़ी ज्यादा चर्चा है कि चारा घोटाले और आय से अधिक संपत्ति घोटाले ने श्री लालू यादव जी और मुलायम सिंह यादव जी को ऐसा कुत्ता बना दिया है जो अपनी जान बचाने के लिए शासक दल के पाँव के तलवे चाटने वाले कुत्ते बन गए है. इस बयान पर मचे तूफ़ान के बाद भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष का खेद प्रकट कर देना मामले का अंत कर देने के लिए काफी …

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May 10

अब अपराधी कौन?

Posted by Amar Singh in General

राह पकड़ तू एक चला-चल, मिल जाएगी मधुशाला. प्रख्यात कवि श्री हरिवंशराय बच्चन जी की मधुशाला की यह प्रसिद्द पंक्ति उन सबो के लिए है जो अपने उसूलों के रास्ते बिना बदले चलते-चलते अपने निर्धारित लक्ष्य पर पहुँच जाते है. लेकिन उन राजनेताओं का क्या करे जो सुबह, दोपहर और शाम कपड़े की तरह अपने उसूल बदल डालते है. समाजवादी पार्टी समर्थन करती है नारायणन के उम्मीदवारी की, राष्ट्रपति बनवा देती है कलाम साहब को, स्वयं समाजवादी पार्टी के मुखिया …

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May 7

राज्य सभा में अंतिम दिन

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आज राज्यसभा का अंतिम दिन और मेरे कई पुराने साथियों के छः वर्षों के कार्यकाल का भी अंतिम दिन था. इस पूरे बजट सत्र में आज मेरा पहला दिन था. समाजवादी दल के नए दूल्हे रामगोपाल का पूरा जलवा दिख रहा था. हर विदा ले रहा समाजवादी सांसद रामगोपाल की चालीसा पढ़ रहा था. जनेश्वर जी की कुर्सी पर आखरी दिन बहैसियत नेता बने बैठे बृजभूषण तिवारी जी का कोई नाम लेवा ना था. कल मुलायम सिंह जी प्रणव मुखर्जी …

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May 6

डिम्पल, मै और हमारी फिल्म

Posted by Amar Singh in General

आज “मुंबई मिट्टई” के सेट पर डिम्पल को और मुझे एक प्रेम गीत युगल दंपत्ति के रूप में गाना था. कोरियोग्राफर ने गीत के फिल्मांकन की कुछ विचित्र मुद्राएँ बताई तो हम एक दूसरे को देखने लगे. मैने डिम्पल से कहा कि छात्र जीवन में सत्तर के दशक में जब आप “बाबी” थी तो यह मुद्राए उचित थी, अब आप बाबी से दादी हो चुकी है, यह अलग बात है कि ५२ वर्ष की आयु में भी आप ४२ से …

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May 5

सहनशीलता की संस्कृति

Posted by Amar Singh in General

क्षमा चाहता हूँ, चाह कर भी कई दिनों से ब्लॉग न लिख पाया. डॉ. राममनोहर लोहिया अंग्रेज़ी के विरोध से ज्यादा भारतीय आंचलिक भाषाओं के प्रचार-प्रसार के पक्षधर रहे. मंदिर, मस्जिद, जाति, वर्ग, धर्म समाज को विभाजित करते है. सिनेमा के अँधेरे में हिन्दू, मुसलमान, ईसाई बिना एक दुसरे की जाति पूंछे कलाकारों के हास्य पर हँसते है और उनके पर्दे के दुःख पर दुखित हो कर रोते है. “मात्रभूमि” केरल का एक बड़ा अख़बार है, इन्होने रेडियो पर …

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