May 1

खंडित-विखंडित तीसरा मोर्चा

Posted by Amar Singh in General

बधाई हो मुलायम सिंह जी, आखिर कब तक आप वामपंथी साथियों से यू.पी.ए.-1 का प्रतिशोध लेंगे? आपने तीन बार वामपंथियों को चूना लगा दिया है. पहली बार नरायणन की हामी भर कर कलाम का कलमा श्री प्रमोद महाजन के कहने पर अडवानी जी और अटल जी के साथ पढ़ कर आपने उस मोर्चे को तोड़ा जिसके आप स्वयं संयोजक और स्वर्गीय ज्योति दा अध्यक्ष थे. आप बदल गए लेकिन वामपंथी भाई नहीं बदले और कैप्टन लक्ष्मी सहगल को राष्ट्रपति …

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Apr 29

धीरे-धीरे बोल कोई सुन ना ले

Posted by Amar Singh in General

आजकल फोन टैपिंग की बड़ी चर्चा है. मुझे एक बात की बड़ी प्रसन्नता है कि जो बात मै बोलता हूँ कुछ दिनों बाद वही बात और भाषा सभी बोलते है. जब बटला हाउस इनकाउन्टर के मुद्दे को मैने उठाया था तो सब चुप थे, यहाँ तक कि मेरे भूतपूर्व नेता श्री मुलायम सिंह जी ने भी मेरे बयान के विरोध में मुझसे कहा था कि उन्हें मुसलमानों की मानसिकता मेरे से ज्यादा पता है. और जब विधानसभा चुनावों में …

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Apr 26

क्रिकेट का सरूर और हमारे थरूर

Posted by Amar Singh in General

शशि थरूर और लालिर मोदी दो व्यक्ति ही नहीं है बल्कि मानव व्यक्तित्व के दो जीवंत उदाहरण है. ललित और उनके परिवार को मै वर्षों से जनता हूँ. ललित म्रदुभाशी, व्यवहारकुशल और मित्रों के मित्र है. कभी भैरों सिंह शेखावत के नजदीकी होते थे फिर लोगों की नज़रों में राजस्थान के प्रशासनिक अन्तःपुर के असली मालिक बन कर चाहे-अनचाहे, जाने-अनजाने मित्रों की कम और शत्रुओं की एक लम्बी जमात बनाई और एक राजनैतिक दल की नेत्री के विवादित सखा के …

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Apr 17

ये कैसी ऐयारी?

Posted by Amar Singh in General

किसी की माने तो दिल से माने, मन ना माने तो कोई बात नहीं! आदरणीय मुलायम सिंह जी व्यवहारिक राजनेता है और अपने राजनैतिक शत्रुओं को भी उन्होंने मान दिया है. श्री बेनी वर्मा, राज बब्बर जी और आज़म खान से बिछड़ने के बाद भी ना तो खुद, नाही उनके परिवार ने और नाही उनके प्रवक्ता ने किसी भी नेता को अपशब्द कहे थे. कांग्रेस, बसपा और पूर्व समाजवादियों में मै अमर सिंह उनकी इस प्रकति के विपरीत उनके परिवार …

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Apr 10

भौतिकता का स्थाईत्व

Posted by Amar Singh in General

आजकल मन बहुत हल्का है. पहली बार मुंबई में बच्चन जी के घर नहीं रुका. अमूमन भीड़ के कारण होटल का कमरा तो कई बार लिया था लेकिन सोने अमित जी के घर ही जाता था. जया जी काफी बीमार है, कल उनका जन्मदिन भी था. घर जा कर उन्हें बधाई दी, बीमारी का हाल-चाल पूछा और चल दिया. कुछ भी अजीब नहीं लगा.
बैठे ठाले मिल रहे लम्बे चौड़े जन समर्थन के बारे में सोचा तो दिखा कि मेरे साथ …

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Apr 1

मुख्य न्यायधीश, गृहमंत्री और प्रधानमंत्री मोदी का क्या करे!

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मै पुणे में था. सिमबायोसिस अंतरराष्ट्रीय विश्वविद्यालय में एक पूर्वनियोजित कार्यक्रम के अनुसार श्री अमिताभ बच्चन जी एवं मेरा संयुक्त संबोधन होना था. ठीक इस कार्यक्रम के पूर्व राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के सार्वजनिक निर्माण मंत्री के निमंत्रण पर कुछ कांग्रेसी साथियों की श्री अमिताभ बच्चन पर टिपण्णी आई जोकि कालांतर में बड़ी मुखर होती गई. व्यक्तिगत कारणों से किये जा रहे इस विरोध को भी तार्किकता का जामा पहनना जरूरी है. गुजरात के पर्यटन और मोदी जी की साम्प्रदायिक राजनीति …

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Mar 27

राष्ट्रीय दल और क्षेत्रीय दल

Posted by Amar Singh in General

भारतीय राजनीति का संक्रमण राष्ट्रीय दलों का कमजोर होना और केन्द्रीय सरकार के गठन में क्षेत्रीय दलों पर निर्भरता के कारण धीरे-धीरे बढ़ता जा रहा है. अतीत में गैर कांग्रेसवाद के प्रवर्तक राजनेताओं ने कांग्रेस के वर्चस्व को चुनौती देने के लिए गैर कांग्रेसी ताकतों को कई बार कभी लोकनायक जयप्रकाश नारायण के नेतृत्व में एवं कई बार वामपंथी मित्रों के सहयोग से एकत्रित करने का उपक्रम किया. मूल रूप से मेरे राजनैतिक जीवन की शुरुआत कांग्रेस से हुई …

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Mar 23

Reality Bites

Posted by Amar Singh in General

In the last two years we had witnessed the volumes of twists and turns in the matters related to the Batla house encounter. It was I who personally felt necessary at that moment about an independent judicial enquiry into the encounter to clear all doubts. I raised questions because I had certain reservations about the approach of the inquiry. If the administration and police have nothing to hide, why were they shying away from an enquiry? The contradicting statements of …

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Mar 22

Politics of Sycophancy

Posted by Amar Singh in General

In politics one has to be thick skin. Many times here misdeed receives bouquets and modesty earns brickbats. Here caste, class and community play a major role while determining your prospect. You need to be both innocent and shrewd at the same time while dealing with others. What you preach, you do not practice and what you practice, you do not preach. Sycophancy brings pleasure and frankness earns bitterness.
Politics is a football of sycophancy where the political players believe …

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Mar 21

मेरे ख़ुलूस ने मुझे रखा अँधेरे में, तेरा फरेब मुझे रोशनी में ले आया

Posted by Amar Singh in General

कल गढ़ मुक्तेश्वर में विधायक मदन चौहान जी के सौजन्य से एक भारी सभा हुई. मथुरा के बाद पश्चिम उत्तर प्रदेश की यह मेरी दूसरी बड़ी सभा थी. स्वर्गीय जनेश्वर जी मुझे अपनी म्रत्यु के एक पखवाड़े पहले मुझे मुलायमवादी से समाजवादी की बेशकीमती हिदायत दी थी. उनकी सलाह मानते हुए इधर लोहिया जी को जानने की कोशिश कर रहा हूँ. डॉ लोहिया के साथी जार्ज फर्नांडिस, मधु लिमये, मामा बालेश्वर, जनेश्वर मिश्र, जगदीश गुप्त, बद्री विशाल पिट्टी जैसे नेता …

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