मेरे प्रिय ब्लागर साथियों, पिछले कुछ दिनों से आप लोगो से मुझे जो प्यार मिला है उसके लिए मै आप सभी का तहे दिल से शुक्रिया करता हूँ. शुरू-शुरू में मुझे लगा की शायद एक राजनैतिक आदमी होने की वजह से मुझे इस खुले मंच में काफी आलोचनाओ का सामना करना पड़ेगा क्यूंकि हमारे देश में राजनीति और उससे जुड़े लोगो की बहुत अच्छी  साख नहीं होती है. परन्तु यदा-कदा आलोचनाओ के अलावा आप लोगो ने मुझे बहुत अधिक उत्साहित किया है. मैने हमेशा से कोशिश की है जिन-जिन लोगो ने मेरी आलोचना की है उन्हें मै संतुष्ट करने वाले जवाब दू परन्तु फिर भी अगर कोई संतुष्ट नहीं हुआ तो मै उनसे माफी मांगता हूँ.

पिछले कुछ महीनो में मेरा अपनी जिंदगी का  सबसे अधिक चुनौती भरा समय गुजरा है. ख़राब स्वास्थ के साथ-साथ मैने अपने व्यक्तिगत और सार्वजनिक जीवन के कुछ खट्टे और कुछ मीठे अनुभवों की अनुभूति की है, इस बात का अहसास शायद आपको मेरी कुछ हाल की पोस्ट्स से हुआ होगा. स्वास्थ कारणों की वजह से जब मैने कुछ दिनों पूर्व अपनी कुछ राजनैतिक जिम्मेदारियो से छुट्टी ली तो मीडिया  ने इसे पूरी तरह से राजनैतिक रंग दे दिया. मिडिया द्वारा इस प्रकरण को दिए गए इस ट्विस्ट से मेरे कुछ साथी भी भ्रम में आ गए और उन्होंने कुछ अनचाही बाते सार्वजनिक रूप से कही और मेरे इस निजी फैसले को राजनैतिक चाल समझने की भूल भी कर दी. वैसे तो मै इस विषय में पूर्ण रूप से चुप रहना चाहता हूँ परन्तु आप लोगो ने जिस तरह से अपने कमेंट्स में अलग-अलग तरह के विचार प्रकट किये है मेरा फर्ज है की मै आप लोगो को कुछ बाते स्पष्ट रूप से बता दू.

मै इस वक्त देश में नहीं हूँ. लोग तरह-तरह की बाते कर रहे है. कुछ कह रहे है कि मै मायावती द्वारा दर्ज फर्जी मुकदमे से डर कर देश के बाहर हूँ. जिस भांति देश से मेरे राजनैतिक भविष्य और इरादों को ले कर राजनीति हो रही है, मुझे लगता है कि मुझे इस गहमागहमी से दूर रहना ही बेहतर है.

सबसे पहली बात यह है कि मै अपने बेहद करीबी महाराष्ट्र के कद्दावर नेता अबू हासिम आज़मी के पुत्र फरहान आज़मी के लिए चिंतित हूँ. मुझे कांग्रेस का चवन्निया सदस्य बनाने वाले एक नेता समाजवादी पार्टी को एक टूटने वाली पार्टी बता कर भिवंडी में फरहान के विरुद्ध भाषण देते हुए कह रहे है कि समाजवादी पार्टी टूट कर कांग्रेस में आ रही है. बकरे की अम्मा पहले हैदराबाद में अपनी ख़ैर मनाये, अपनी टूटती पार्टी और डूबती नैय्या बचाए. मै विदेश से सीधे तन, मन और धन के साथ फरहान के लिए मुंबई पहुँच रहा हूँ.

मेरी आलोचना आदरणीय मुलायम सिंह जी ने कभी नहीं की है और ना ही मैने उनके विरुद्ध एक शब्द कहा है, तो फिर बटवारा और टूट कहाँ? श्री संजय दत्त, सुश्री जया प्रदा और अमर सिंह भले ही पदाधिकारी न हो, पार्टी के साधारण सदस्य तो है ही. चुनाव नेता नहीं कार्यकर्ता लड़वाते है. हमारा नेतृत्व इटावा में सम्पादित हो रहे है वार्षिक ”सैफई महोत्सव” में व्यस्त है पर हम साधारण कार्यकर्ता सम्पूर्ण उर्जा के साथ अबू आज़मी और फरहान आज़मी के साथ है. १९ जनवरी को जयाप्रदा जी भिवंडी जा रही है. जयाप्रदा जी एक बहुत बड़ी तेलगू स्टार और तेलगू भाषियों की बहुत चहेती है. उत्तर प्रदेश के बड़े समाजवादी नेताओ की तरह अबू आज़मी को फिल्म स्टारों से परहेज़ नहीं है. इसलिए श्रीमती जया बच्चन भिवंडी जा चुकी है और अब जयाप्रदा और संजय दत्त भी जायेंगे और मै तो वहां पड़ा ही रहूँगा ताकि पुत्रवत फरहान की विजय हो.

मैने स्वास्थ कारणों से सिर्फ कुछ पदों से स्तीफा दिया है. मै आज भी समाजवादी पार्टी का सदस्य हूँ. मेरे इस्तीफे से अलग-अलग तरह की अटकले लगाई गयी किसी ने बोला की मै इस पार्टी में जा रहा हूँ कोई बोला उस पार्टी में, यहाँ तक की मेरे कांग्रेस पार्टी में जाने की भी बात कही गयी. पता नहीं कांग्रेस पार्टी के कुछ नेता  मेरे कांग्रेस पार्टी में जाने की अफवाह को सुन कर डर सा गए और उन्होंने कुछ बौखलाहट दर्शाने वाले वक्तव्य भी दे डाले. उन्होंने ने तो यहाँ तक कह डाला की शायद मुझे कांग्रेस में २५ पैसे वाली सदस्यता भी नहीं मिले. मै इन महानुभाव को आदरपूर्वक बताना चाहता हूँ की मै आज भी समाजवादी पार्टी में बहुत ही आरामपूर्वक हूँ और मुझे मेरे नेता का स्नेह और विशवास आज भी  उसी तरह से प्राप्त है जैसा की वर्षो से मिलाता आ रहा है. हां, भगवान् न करे अगर भविष्य में कभी कोई ऐसी परिस्थिति बनी कि मुझे राजनैतिक  विकल्प तलाशने पड़े तो मेरे पास विकल्पों की कमी नहीं है और हां यदि मुझे इन २५ पैसे वाले कांग्रेसी नेता की मदद से राजनैति करने की जरूरत पडी तो में सार्वजनिक जीवन से संन्यास लेना बेहतर समझूंगा.

कल समाजवादी पार्टी के कुछ जिले और ब्लाक स्तर के नेताओ ने मुलायम सिंह जी से मुझे छुट्टी देने को कहा. मुझे दुख है कि मेरे ऊपर यह आक्रमण नेताजी, अखिलेश और स्वयं रामगोपाल जी के साथ वार्ता होने के बाद की गयी, और हद तो यह है कि श्री वीरपाल जी ने यहाँ तक कह डाला कि इस सारे घटनाक्रम में आदरणीय नेताजी का हाथ है. अब मुझे भी पता लगने लगा है कि नेता जी इच्छा के बाद, उनके सैफई महोत्सव के निमंत्रण के बाद चुने हुए एक खास गुट के मुस्लिम नेताओ का छोटा समूह मुझे कल्याण सिंह जी के नाम पर क्यूँ कोस रहा है.

आदरणीय कल्याण सिंह जी मुझसे बहुत बड़े कद के नेता है और उनका स्तर श्री मुलायम सिंह जी के समकच्छ  है. आज के उनके स्पष्ठीकरण से कम से कम समाजवादी पार्टी से उनकी निकटता का मुख्य सूत्रधार कम से कम अमर सिंह नहीं है, यह तो स्पष्ट हो गया है. फिरोजाबाद चुनाव के दौरान मै सिंगापूर में था और उसी दौरान हुए आगरा सम्मलेन में मुख्य अतिथि के रूप में कल्याण सिंह जी को आमंत्रण की चिट्ठी दल के परिवार से सम्बद्ध एक महत्वपूर्ण राश्ट्रीय महासचिव (श्री रामगोपाल जी) ने संप्रेषित किया था. पूरे आगरा में नेता जी के लगभग बराबर कल्याण सिंह जी की तस्वीरे लगाई गयी थी और वह सारे मुस्लिम नेता जिन्होंने कल मेरी आलोचना की थी मंच से कल्याण सिंह जिंदाबाद के नारे लगा रहे थे. अनावश्यक रूप से ख़त्म हो चुकी बाते कुरेद कुरेद कर आप अमर सिंह का कतई नहीं बल्कि हमारे प्रिय नेता श्री मुलायम सिंह जी का नुक्सान ”कल्याण खुलासे” के बाद बुरी तरह कर रहे है; बराये करम बाज आइये. और हां, आज मुझे पंजाब नॅशनल बैंक के पुराने चेयरमैन जिलानी याद आ रहे है जिनकी सिफारिश पर मै पहली बार संभल के नवाब इक़बाल को नेताजी के पास ले कर गया था और आज इनका इकबाल इतना बुलंद है कि मै अमर सिंह देखता रह गया और नवाब साहेब मंत्री हो गए. कल्याण सिंह जी ने अपने सियासी दौर के सबसे महत्वपूर्ण पलों में समाजवादी पार्टी के साथ बनी स्वयं की भूमिका में श्री मुलायम सिंह जी को अपना हीरो बनाया और महफ़िल की जिक्रेख़ैर की बातो का खुलासा कर इकबाल महमूद एंड कम्पनी की मुहीम, अमर सिंह “कल्याण फैक्टर” के जिम्मेदार, के आरोप और इलज़ाम से मुझे मुक्ति दिला दी.

समाजवादी पार्टी के चंद बड़े नेताओ की ख़ास पसंद बन चुके जनाब आज़म खान अब मुतमईन हो जाए कि इस सियासती पायजेब को मैने पार्टी के पांव में बिलकुल नहीं बांधा, बाअदब, बमुलाहज़ा होशियार यह खुलासा खुद शहंशाहे बरबादिए बाबरी मस्जिद माबदौलत जनाब कल्याण सिंह साहब खुद अपने जानिब से कह रहे है. हालाँकि इस मसले में नेताजी के मंत्रिमंडल में कल्याण सिंह जी के पुत्र राजवीर जी और श्रीमती कुसुम राय जी के साथ मंत्री रह चुके भाई आज़म खान और बेनी वर्मा जी के साहबजादे श्री राकेश वर्मा और उस सरकार को हिमायती का ख़त देने वाली आदरणीय कांग्रेस अध्यक्ष भी बराबर की सियासी हिस्सेदारी की मुस्तहक है. अकेले मुलायम सिंह जी घेरे में क्यूँ आये? सियासत के इस हमाम में सब नंगे है. २०१२ अभी दूर है, आइये ईमानदारी से यह बात हम सब मान ले.

मुझसे रूठे मेरे भाई अरविन्द सिंह आजकल हमारी पार्टी पर भड़के हुए है. पहले मुझसे भड़क कर कांग्रेस और फिर वहाँ से भाजपा में चले गए. पार्टी में नेताजी के साथ रहने वाले भाई के बयान पर नेताजी का नियंत्रण नहीं तो फिर समाजवादी पार्टी से भगा दिए गए रूठे भाई पर अमर सिंह का नियंत्रण कहाँ से होगा? नेता जी, न आपके भाई आपके नियंत्रण में न मेरे भाई मेरे नियंत्रण में. पर मुझे इस बात का फक्र जरूर है कि मैने कभी भी अपने परिवार के सदस्यों की राजनैतिक महत्वकंछाओ को सपा में बढ़ावा नहीं दिया.  दुर्भाग्यवश सियासत की फ्री स्टाइल कुश्ती चल रही है, मुझे माफ़ करे.

जया बच्चन जी खामोश है परन्तु बहुत दुखी है. विधान परिषद् चुनावों के एक दिन पहले दिए मेरे इस्तीफे से यदि दल को नुक्सान हुआ हो तो मै हाँथ जोड़ कर माफी मांगता हूँ. अगर कुछ लोगो की माने तो मै कुछ हूँ ही नहीं तो फिर मेरे इस्तीफे की अनुकूलता या प्रतिकूलता क्या? फिर भी यदि मेरी कुछ प्रासंगिगता है तो इस भूल के लिए प्रत्याशियों एवं दल के शीर्ष नेतृत्व से इस कार्यकर्ता की छमा याचना.

सैफई से उत्साहवर्धक वार्ता के बाद सुकून मिला है, अपरान्ह तक दल के कुछ विधायक टिड्डी दल की तरह मेरे रक्त के प्यासे हो जाते है, बीच-बीच में ठंढी फुहार की तरह ओबेदुल्ला खान आज़मी और दूसरे आज़मी अबू हासिम की हिमायत एक तीसरे आज़मी अमर आज़मी के लिए आ जाती है तो नींद आ जाती है, यह सोच कर कि तन्हा नहीं मै, कोई तो साथ है. अल्लाह जाने कही मेरे ये हिमायती मेरी हिमायत में सियासत की कुर्बानी के बकरे न बन जाये.

कल शाम ब्लाग लिखने से पहले नेता जी को संपर्क करने की कोशिश की पर बात नहीं हो पाई. सैफई महोत्सव चल रहा है, बड़ी भीड़ होगी, वही मसरूफ होंगे.

“तुम्हे अपनो से कब फुर्सत, न हम अपने गम से खाली, चलो बस हो चूका मिलना, न तुम खाली न हम खाली”

अंत में शरद पवार जी को धन्यवाद इस स्पष्ठीकरण के लिए कि मैने उनसे कोई राजनैतिक सौदेबाजी की बात नहीं की है. लिखते-लिखते बयान आया है कि भाई राम गोपाल फिर कुछ बोले. सुबह कुछ, शाम को कुछ, छड़े रुष्टा छड़े तुष्टा, चूँकि भाई रामगोपाल जी नेता जी के परिवार के है अतएव मुझे कुछ नहीं कहना है. श्री बेनी वर्मा जी, श्री राज बब्बर जी, श्री कल्याण सिंह जी, श्रीमती रीता बहुगुणा जोशी जी, श्री राजनाथ जी, राष्ट्रवादी कांग्रेस के श्री डी पी त्रिपाठी जी या तो मौन हो गए है या सभी ने मेरी प्रशंषा की है. गलियां तो मुझे मेरे घर में ही दी जा रही है, जहा मैने अपना तन-मन धन सब दे डाला. मोहन भाई का बयान आया कि जो पैसा उन्होंने लिया वह मेरा  नहीं पार्टी का था और मै इस पैसे का सिर्फ कस्टोडियन हूँ. पार्टी के सारे पैसे एवं कोष के कस्टोडियन आदरणीय मुलायम सिंह जी के सचिव श्री जगजीवन जी है. आज तक सपा में हर स्तर पर राजनैतिक पैसे एवं कोष के लेखा जोखा के चित्रगुप्त जगजीवन जी ही रहे है. श्री मोहन सिंह जी ने पार्टी के चित्रगुप्त जगजीवन जी से अलग और मुझसे नेता जी के अनुरोध पर लन्दन इलाज के लिए मेरा निजी पैसा और अपने चुनाव के लिए भी निजी पैसा अलग से लिया था. आज तक नेता जी ने मुझे पार्टी के कोष का कस्टोडियन नहीं बनाया है. मेरी यह बाते झूठ हो तो नेता जी स्वयं खंडन करे, भाई मोहन सिंह जी,

“मेरी एक बात पर इतना गिला हुआ, कुछ तुम्हे भी याद है अपना कहा हुआ”

अंत में यदि रामगोपाल भाई इतने नाराज है तो उनसे सैफई महोत्सव में मुझे अतिथि बनाने के अपने प्रस्ताव पर नेताजी और परिवार एक बार पुनर्विचार करले. अब मुझे यह ज्ञान हो गया है कि ईसा को सूली, गांधी को गोली और सुकरात को उनके अपने मित्रो ने जहर दिया क्यूँ दिया. मुझे समाजवादी पार्टी और उसके प्रथम परिवार से गोली, सूली और जहर की उम्मीद बिलकुल नहीं है पर हां मुझे अपने नेता और बड़े भाई मुलायम सिंह जी से बहुत उम्मीदे है.

Bookmark and Share

Tags: , , , , ,